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Kullu News: ब्यास पार से ही परंपरा निभाते हैं खराहल घाटी के पांच देवता
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खराहल (कुल्लू)। जिले के देव महाकुंभ दशहरा में पांच देवता ब्यास नदी पार से ही रघुनाथ जी का अभिनंदन करते हैं। मुख्यालय के ठीक ब्यास नदी की बाईं ओर रघुनाथ की रथ यात्रा में हाजिरी भरते हैं। खराहल घाटी के गांव अंगु डोभी में छह दिन तक अस्थायी शिविर में रहकर देव परंपरा का निर्वहन करते हैं।
सातवें दिन अपने देवालय के लिए प्रस्थान करते हैं। यह देव परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन देवताओं के कारकूनों का कहना है कि देवताओं के अपने नियम होते हैं। इनका श्रद्धा के साथ देवलू और हारियान पालन करते हैं। बुधवार को सैकड़ों हारियानों के साथ ये देवता ढोल की थाप पर अंगु डोभी में अपने अस्थायी शिविर पहुंचे। रघुनाथ की रथयात्रा से लेकर लंका दहन तक इन देवताओं की हर रोज पूजा-अर्चना होती है।
वहां पर ही दशहरा की तमाम देव परंपराओं को देव विधि विधान के अनुसार पूरा किया जाता है। दशहरा के अंतिम दिन लंका दहन के बाद ही तमाम देवता अपने देवालय के लिए लौट जाते हैं। देवता शुक्री नाग के पुजारी टिकम राम ने कहा कि सदियों पुराने नियम के मुताबिक देवता ब्यास नदी पार नहीं करते हैं। लिहाजा देवता ब्यास पार से ही दशहरा में शामिल होते हैं। मलाणा के देवता ऋषि जममू, जाणा के जीव नारायण, सौर के सरवल नाग, तांदला के शुक्री नाग और सोयल के देवता आजीमल ब्यास नदी पार ही डेरा जमाए रहते हैं। संवाद
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सातवें दिन अपने देवालय के लिए प्रस्थान करते हैं। यह देव परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन देवताओं के कारकूनों का कहना है कि देवताओं के अपने नियम होते हैं। इनका श्रद्धा के साथ देवलू और हारियान पालन करते हैं। बुधवार को सैकड़ों हारियानों के साथ ये देवता ढोल की थाप पर अंगु डोभी में अपने अस्थायी शिविर पहुंचे। रघुनाथ की रथयात्रा से लेकर लंका दहन तक इन देवताओं की हर रोज पूजा-अर्चना होती है।
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वहां पर ही दशहरा की तमाम देव परंपराओं को देव विधि विधान के अनुसार पूरा किया जाता है। दशहरा के अंतिम दिन लंका दहन के बाद ही तमाम देवता अपने देवालय के लिए लौट जाते हैं। देवता शुक्री नाग के पुजारी टिकम राम ने कहा कि सदियों पुराने नियम के मुताबिक देवता ब्यास नदी पार नहीं करते हैं। लिहाजा देवता ब्यास पार से ही दशहरा में शामिल होते हैं। मलाणा के देवता ऋषि जममू, जाणा के जीव नारायण, सौर के सरवल नाग, तांदला के शुक्री नाग और सोयल के देवता आजीमल ब्यास नदी पार ही डेरा जमाए रहते हैं। संवाद
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