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Kullu News: कीमोथैरेपी के लिए नहीं लग रही शिमला-चंडीगढ़ की दौड़
Thu, 30 Jan 2025 10:53 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 30 Jan 2025 10:53 PM IST
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कैंसर रोग से पीड़ित मरीजों के क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में ही मिल रही सुविधा
पहले महीने में दो बार लगाने पड़ते थे मेडिकल कॉलेजों के चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में स्थापित कीमोथैरेपी केंद्र कैंसर के मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। इस बीमारी से जुड़े मरीजों को मेडिकल कॉलेजों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
कुल्लू अस्पताल में ही कीमोथैरेपी से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अस्पताल में कीमोथैरेपी मिलना मरीजों के मर्ज को कम कर रहा है। हालांकि, इससे पहले कीमोथैरेपी से उपचार करवाने के लिए मरीजों को आईजीएमसी शिमला, मेडिकल कॉलेज टांडा और पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ते थे। अब छह माह से यह सुविधा क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपलब्ध करवाई गई है।
कैंसर से पीड़ित मरीजों को महीने में कम से कम दो बार कीमोथैरेपी करवानी पड़ती है। इसके लिए जिले से बाहर जाना पड़ रहा था। अब इस समस्या से निजात मिली है। अब तक छह माह में कीमोथैरेपी के 130 सेशन हो चुके हैं। इनमें करीब 60 से 70 मरीज हैं, जिन्हें घर-द्वार के समीप उपचार की सुविधा मिली है। अब वे मेडिकल कॉलेजों के चक्कर नहीं लगा रहे हैं। उपचार आने वाले अतिरिक्त खर्चे से भी मरीज और तीमारदार बच रहे हैं। उधर, कीमोथैरेपी विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. रीमा घई ने कहा कि कुल्लू अस्पताल में कैंसर मरीजों को कीमोथैरेपी की सुविधा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा देने के लिए प्रयासरत है।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग कैंसर से पीड़ित मरीजों को घर-द्वार के समीप कीमोथैरेपी की सुविधा दे रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कैंंसर से पीड़ित मरीजों का उपचार विशेषज्ञ कर रहे हैं। मरीजों का मेडिकल कॉलेज जाने का खर्च इससे कम हुआ है। -डॉ. एनआर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
-- कैंसर के सेल्स खत्म करने के लिए होती है कीमोथैरेपी
कैंसर रोग घातक बीमारी है। इसमें शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाओं का अनियंत्रित विभाजन होने लगता है। कैंसर के उपचार में कीमोथैरेपी प्रचलित उपचार है। कीमोथैरेपी का इस्तेमाल कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिए किया जाता है। कीमोथैरेपी कैंसर के सेल्स को फैलने से रोकती है। इस दौरान कैंसर को खत्म करने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं के वजह से कैंसर ट्यूमर सिकुड़ जाते हैं और फैलते नहीं हैं।
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पहले महीने में दो बार लगाने पड़ते थे मेडिकल कॉलेजों के चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में स्थापित कीमोथैरेपी केंद्र कैंसर के मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। इस बीमारी से जुड़े मरीजों को मेडिकल कॉलेजों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
कुल्लू अस्पताल में ही कीमोथैरेपी से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अस्पताल में कीमोथैरेपी मिलना मरीजों के मर्ज को कम कर रहा है। हालांकि, इससे पहले कीमोथैरेपी से उपचार करवाने के लिए मरीजों को आईजीएमसी शिमला, मेडिकल कॉलेज टांडा और पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ते थे। अब छह माह से यह सुविधा क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपलब्ध करवाई गई है।
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कैंसर से पीड़ित मरीजों को महीने में कम से कम दो बार कीमोथैरेपी करवानी पड़ती है। इसके लिए जिले से बाहर जाना पड़ रहा था। अब इस समस्या से निजात मिली है। अब तक छह माह में कीमोथैरेपी के 130 सेशन हो चुके हैं। इनमें करीब 60 से 70 मरीज हैं, जिन्हें घर-द्वार के समीप उपचार की सुविधा मिली है। अब वे मेडिकल कॉलेजों के चक्कर नहीं लगा रहे हैं। उपचार आने वाले अतिरिक्त खर्चे से भी मरीज और तीमारदार बच रहे हैं। उधर, कीमोथैरेपी विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. रीमा घई ने कहा कि कुल्लू अस्पताल में कैंसर मरीजों को कीमोथैरेपी की सुविधा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा देने के लिए प्रयासरत है।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग कैंसर से पीड़ित मरीजों को घर-द्वार के समीप कीमोथैरेपी की सुविधा दे रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कैंंसर से पीड़ित मरीजों का उपचार विशेषज्ञ कर रहे हैं। मरीजों का मेडिकल कॉलेज जाने का खर्च इससे कम हुआ है। -डॉ. एनआर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
कैंसर रोग घातक बीमारी है। इसमें शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाओं का अनियंत्रित विभाजन होने लगता है। कैंसर के उपचार में कीमोथैरेपी प्रचलित उपचार है। कीमोथैरेपी का इस्तेमाल कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिए किया जाता है। कीमोथैरेपी कैंसर के सेल्स को फैलने से रोकती है। इस दौरान कैंसर को खत्म करने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं के वजह से कैंसर ट्यूमर सिकुड़ जाते हैं और फैलते नहीं हैं।