जल स्रोत जमना शुरू, विद्युत प्रोजेक्टों में गिरा उत्पादन
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पहाड़ों पर पारा गिरते ही कुल्लू और लाहौल-स्पीति में रात को कड़ाके की ठंड से जल स्रोत जमना शुरू हो गए हैं। जल स्रोतों के जम जाने तथा सूखे के कारण जिला की विद्युत परियोजना में विद्युत उत्पादन गिरा है। नदी-नालों में पानी की मात्रा घटकर 50 फीसदी से भी कम रह गई है। विद्युत परियोजना में गर्मियों की अपेक्षा कम विद्युत उत्पादन हो रहा है। जिला कुल्लू में एनएचपीसी, एलायन दुहाहगन, मलाणा पावर विद्युत परियोजना, एवरेस्ट विद्युत परियोजना, उसाका पावर प्रोजेक्ट सहित एक दर्जन से अधिक विद्युत परियोजनाएं हैं। इन विद्युत परियोजनाओं में सैकड़ों मैगावॉट विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है।
जिला से पैदा होने वाली बिजली से हिमाचल प्रदेश के साथ लगते प्रदेश रोशन हो रहे हैं। पानी का जलस्तर कम होने से जहां विद्युत परियोजनाओं पर इसका असर पड़ेगा। वहीं इससे प्रदेश सरकार को भी परियोजनाओं से मिलने वाला राजस्व भी घटेगा। गौर रहे कि शीत मरूस्थल लाहौल सहित जिला कुल्लू की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पारा गिरने के कारण पानी जमना शुरू हो गया है। हालांकि पानी के कम होने की वजह सूखा भी बताया जा रहा है। वहीं एनएचपीसी के महाप्रबंधक ऐके सिंह ने कहा कि एनएचपीसी का इस वर्ष में 680 मिलियन यूनिट बिजली पैदा करने का लक्ष्य था। इसमें से 615 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन के लक्ष्य को पूरा किया जा चुका है। एनएचपीसी इस साल अपने लक्ष्य को आसानी से पूरा कर लेगी। इधर लगवैली में उसाका हाइड्रो पावर लिमिटेड के चीफ राजेश वर्मा के अनुसार काफी समय से बारिश व ठंड से 60 फीसदी विद्युत उत्पादन गिरा है।