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Kullu News: बारिश से दुखी जनता पहुंची देवता धुंबल के दरबार
Mon, 25 Aug 2025 10:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 25 Aug 2025 10:59 PM IST
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बारिश रोकने की प्रार्थना की, देवता बोले अनहोनी का अंदेशा
देव समाज को बारिश रोकने का भी उपया सुझाया
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। लगातार हो रही बारिश से हो रहे नुकसान को देखते हुए लोग अब देवी-देवताओं की शरण में पहुंच गए हैं। ऊझी घाटी के लोग नाग धुंबल के दरबार पहुंचे हैं और बारिश को रोकने की प्रार्थना की है।
ग्रामीणों ने देवता से इस प्राकृतिक आपदा को रोकने और उन्हें सुरक्षित रखने की गुहार लगाई। नाग धुंबल ने अपने गुर के माध्यम से कहा है कि यह आपदा मनुष्य के कर्मों का फल है। मनुष्य ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है और देव नीति में राजनीति लाई है। देवताओं के फैसले की अवहेलना हो रही है। यही कारण है कि आपदा का दौर आया है। उन्होंने गुर के माध्यम से अनहोनी होने का भी अंदेशा जताया है।
देवता नाग धुंबल ने आगे कहा कि 18 करड़ू (18 करोड़ देवी-देवता) नाराज हैं। उन्होंने ग्रामीणों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन देवी-देवताओं ने अपनी नजर फेर ली तो इसका अंजाम और भी बुरा हो सकता है। नाग धुंबल के कारदार बहादुर का कहना है कि देवता ने आपदा को रोकने के लिए देव समाज को उपाय बताया है जिस पर काम करना है।
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देव समाज को बारिश रोकने का भी उपया सुझाया
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। लगातार हो रही बारिश से हो रहे नुकसान को देखते हुए लोग अब देवी-देवताओं की शरण में पहुंच गए हैं। ऊझी घाटी के लोग नाग धुंबल के दरबार पहुंचे हैं और बारिश को रोकने की प्रार्थना की है।
ग्रामीणों ने देवता से इस प्राकृतिक आपदा को रोकने और उन्हें सुरक्षित रखने की गुहार लगाई। नाग धुंबल ने अपने गुर के माध्यम से कहा है कि यह आपदा मनुष्य के कर्मों का फल है। मनुष्य ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है और देव नीति में राजनीति लाई है। देवताओं के फैसले की अवहेलना हो रही है। यही कारण है कि आपदा का दौर आया है। उन्होंने गुर के माध्यम से अनहोनी होने का भी अंदेशा जताया है।
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देवता नाग धुंबल ने आगे कहा कि 18 करड़ू (18 करोड़ देवी-देवता) नाराज हैं। उन्होंने ग्रामीणों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन देवी-देवताओं ने अपनी नजर फेर ली तो इसका अंजाम और भी बुरा हो सकता है। नाग धुंबल के कारदार बहादुर का कहना है कि देवता ने आपदा को रोकने के लिए देव समाज को उपाय बताया है जिस पर काम करना है।
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