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Kullu News: आपदा से निपटने में खुद सक्षम होंगी पंचायतें, आपदा प्रतिक्रिया केंद्र बनेंगे
Mon, 07 Apr 2025 10:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 07 Apr 2025 10:32 PM IST
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जिले में राहत एवं बचाव कार्य समय पर शुरू करने का बनाया जा रहा मास्टर प्लान
प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिलकर करेंगे काम, जमीन स्तर पर बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिला कुल्लू प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैै। ऐसे में आपदा से निपटने और राहत एवं बचाव कार्य समय पर शुरू करने का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। अब हर पंचायत को आपदा से निपटने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
जिले की हर एक पंचायत में आपदा प्रतिक्रिया केंद्र (पीईआरसी) स्थापित किया जाएगा। प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस दिशा में मिलकर कार्य करेंगे। इसके लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जन भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
गौर रहे कि हिमालय क्षेत्र में स्थित हिमाचल प्रदेश भूस्खलन, भूकंप, अचानक बाढ़, बादल फटने और भारी बर्फबारी जैसे प्राकृतिक खतरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। जिला कुल्लू में प्राकृतिक आपदा से किसी तरह का नुकसान न हो। इस दिशा में पहल आरंभ कर दी गई है। हर पंचायत में आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र आपदा प्रबंधन, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में काम करेगा, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करेगा। इसमें त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय क्षमताओं का निर्माण करना शामिल है, जिससे आपात स्थितियों के दौरान बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम हो जाएगी। इससे समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) में पंचायतों और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जाएगा। जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता और तैयारी को बढ़ाया जाएगा।
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उधर, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुल्लू समन्वयक प्रशांत ने कहा कि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए पंचायतों को सक्षम बनाया जाएगा। इसके लिए हर पंचायत में पीईआरसी स्थापित करने की योजना है।
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पीईआरसी का प्राथमिक उद्देश्य जमीनी स्तर पर आपदा की तैयारी, प्रतिक्रिया और पुन:प्राप्ति के लिए एक संगठित, समुदाय-आधारित ढांचा स्थापित करना है। आपदा के बाद महत्वपूर्ण समय में स्थानीय संसाधनों का लाभ उठाना है। नई मुहिम के तहत हर पंचायत में आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। किसी भी आपदा के समय प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले लोगों का, जो आपदा के स्थान पर उपस्थित हैं। उनका सूचना सही तरीके से देने के लिए जागरूक होना आवश्यक है। - तोरुल एस रवीश, उपायुक्त
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प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिलकर करेंगे काम, जमीन स्तर पर बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिला कुल्लू प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैै। ऐसे में आपदा से निपटने और राहत एवं बचाव कार्य समय पर शुरू करने का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। अब हर पंचायत को आपदा से निपटने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
जिले की हर एक पंचायत में आपदा प्रतिक्रिया केंद्र (पीईआरसी) स्थापित किया जाएगा। प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस दिशा में मिलकर कार्य करेंगे। इसके लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जन भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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गौर रहे कि हिमालय क्षेत्र में स्थित हिमाचल प्रदेश भूस्खलन, भूकंप, अचानक बाढ़, बादल फटने और भारी बर्फबारी जैसे प्राकृतिक खतरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। जिला कुल्लू में प्राकृतिक आपदा से किसी तरह का नुकसान न हो। इस दिशा में पहल आरंभ कर दी गई है। हर पंचायत में आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र आपदा प्रबंधन, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में काम करेगा, जो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करेगा। इसमें त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय क्षमताओं का निर्माण करना शामिल है, जिससे आपात स्थितियों के दौरान बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम हो जाएगी। इससे समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) में पंचायतों और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जाएगा। जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता और तैयारी को बढ़ाया जाएगा।
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उधर, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुल्लू समन्वयक प्रशांत ने कहा कि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए पंचायतों को सक्षम बनाया जाएगा। इसके लिए हर पंचायत में पीईआरसी स्थापित करने की योजना है।
पीईआरसी का प्राथमिक उद्देश्य जमीनी स्तर पर आपदा की तैयारी, प्रतिक्रिया और पुन:प्राप्ति के लिए एक संगठित, समुदाय-आधारित ढांचा स्थापित करना है। आपदा के बाद महत्वपूर्ण समय में स्थानीय संसाधनों का लाभ उठाना है। नई मुहिम के तहत हर पंचायत में आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। किसी भी आपदा के समय प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले लोगों का, जो आपदा के स्थान पर उपस्थित हैं। उनका सूचना सही तरीके से देने के लिए जागरूक होना आवश्यक है। - तोरुल एस रवीश, उपायुक्त