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छह सौ स्कूलों में आग से निपटने के उपकरण नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले कुल्लू में फायर सीजन शुरू हो गया है। 1,012 सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च पाठशालाओं में से 600 स्कूलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कुछ एक माध्यमिक और उच्च स्कूलों में ही अग्नि सुरक्षा यंत्र हैं, जबकि अन्य स्कूल नियमों को ताक पर रखकर विद्यार्थियों की जान खतरे में डाल रहे हैं।
स्कूलों में मिड-डे मील शुरू होने के बाद खतरा अधिक बढ़ा है। रसोईघर में भी आग से निपटने के लिए यंत्र स्थापित नहीं किए गए हैं। बता दें कि जिले में समय-समय पर अग्निशमन विभाग की ओर से स्कूलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कई सरकारी स्कूलों में आग से निपटने के उपकरण नहीं हैं। इस कारण दमकल विभाग की ओर से अपने उपकरण ले जाकर विद्यार्थियों को जानकारी देनी पड़ती है। अब सवाल उठता है कि अगर स्कूलों में अचानक आग की घटना होती है तो उस समय विद्यार्थी आग को बुझाने के लिए किसका प्रयोग करेंगे। ऐसे में विद्यार्थियों को आग से निपटने का प्रशिक्षण देकर मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है।
स्कूलों से मांगी जाएगी रिपोर्ट : उपनिदेशक
प्रारंभिक शिक्षा विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. सुरजीत राव ने बताया कि जिन स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं, उनकी रिपोर्ट संबंधित ब्लॉक से मांगी जाएगी। इसके लिए पत्र लिखा जाएगा। अधिकतर स्कूलों में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं, जबकि बड़े स्कूलों में पांच से छह यंत्र स्थापित किए हैं।
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विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर
उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक डॉ. शांति लाल ने बताया कि जिन स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं है, वहां लगाए जा रहे हैं। जो अग्निशमन यंत्र खाली हो जाते हैं, उन्हें दोबारा भर दिया जाता है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर है।
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कुल्लू। जिले कुल्लू में फायर सीजन शुरू हो गया है। 1,012 सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च पाठशालाओं में से 600 स्कूलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कुछ एक माध्यमिक और उच्च स्कूलों में ही अग्नि सुरक्षा यंत्र हैं, जबकि अन्य स्कूल नियमों को ताक पर रखकर विद्यार्थियों की जान खतरे में डाल रहे हैं।
स्कूलों में मिड-डे मील शुरू होने के बाद खतरा अधिक बढ़ा है। रसोईघर में भी आग से निपटने के लिए यंत्र स्थापित नहीं किए गए हैं। बता दें कि जिले में समय-समय पर अग्निशमन विभाग की ओर से स्कूलों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। कई सरकारी स्कूलों में आग से निपटने के उपकरण नहीं हैं। इस कारण दमकल विभाग की ओर से अपने उपकरण ले जाकर विद्यार्थियों को जानकारी देनी पड़ती है। अब सवाल उठता है कि अगर स्कूलों में अचानक आग की घटना होती है तो उस समय विद्यार्थी आग को बुझाने के लिए किसका प्रयोग करेंगे। ऐसे में विद्यार्थियों को आग से निपटने का प्रशिक्षण देकर मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है।
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स्कूलों से मांगी जाएगी रिपोर्ट : उपनिदेशक
प्रारंभिक शिक्षा विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. सुरजीत राव ने बताया कि जिन स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं, उनकी रिपोर्ट संबंधित ब्लॉक से मांगी जाएगी। इसके लिए पत्र लिखा जाएगा। अधिकतर स्कूलों में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं, जबकि बड़े स्कूलों में पांच से छह यंत्र स्थापित किए हैं।
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विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर
उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक डॉ. शांति लाल ने बताया कि जिन स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं है, वहां लगाए जा रहे हैं। जो अग्निशमन यंत्र खाली हो जाते हैं, उन्हें दोबारा भर दिया जाता है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर है।