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लाहौल घाटी भालुओं के लिए उपयुक्त निवास स्थान : संदीप
Thu, 24 Oct 2024 07:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 24 Oct 2024 07:45 AM IST
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केलांग में शुरू हुई कार्यशाला में मुख्यातिथि का स्वागत करते अधिकारी। -स्रोत ः डीपीआरओ
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिला मुख्यालय केलांग में भारतीय हिमालयी क्षेत्र के संकटग्रस्त स्तनधारी जीवों की निगरानी के तरीकों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण कोलकाता और हिमाचल प्रदेश वन विभाग की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीव निगरानी में क्षमता निर्माण और क्षेत्र में प्रमुख संरक्षण चुनौतियों का समाधान करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य अरण्यपाल वन वृत्त कुल्लू संदीप शर्मा और विशिष्ट अतिथि उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार रहे। संदीप शर्मा ने कहा कि लाहौल घाटी भालुओं के लिए उपयुक्त निवास स्थान है। उन्होंने फसलों के नुकसान को लेकर स्थानीय समुदायों की चिंताओं को स्वीकार करते हुए मुआवजा योजनाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
उपायुक्त राहुल कुमार ने कार्यशाला में हुई चर्चाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे पारिस्थितिक पर्यटन (इको-टूरिज्म) के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं, जो वैकल्पिक आजीविका का माध्यम बन सकते हैं। कार्यशाला के दौरान विश्व हिम तेंदुआ दिवस भी मनाया गया, जहां भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. भीम दत्त जोशी ने हिम तेंदुए की मौजूदगी और संरक्षण के महत्व पर जानकारी दी।
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इस अवसर पर डॉ. विनीत कुमार, पूर्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनिल ठाकुर, अनिकेत वानवे और डॉ. अमीरा सहित कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य अरण्यपाल वन वृत्त कुल्लू संदीप शर्मा और विशिष्ट अतिथि उपायुक्त लाहौल-स्पीति राहुल कुमार रहे। संदीप शर्मा ने कहा कि लाहौल घाटी भालुओं के लिए उपयुक्त निवास स्थान है। उन्होंने फसलों के नुकसान को लेकर स्थानीय समुदायों की चिंताओं को स्वीकार करते हुए मुआवजा योजनाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
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उपायुक्त राहुल कुमार ने कार्यशाला में हुई चर्चाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे पारिस्थितिक पर्यटन (इको-टूरिज्म) के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं, जो वैकल्पिक आजीविका का माध्यम बन सकते हैं। कार्यशाला के दौरान विश्व हिम तेंदुआ दिवस भी मनाया गया, जहां भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. भीम दत्त जोशी ने हिम तेंदुए की मौजूदगी और संरक्षण के महत्व पर जानकारी दी।
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इस अवसर पर डॉ. विनीत कुमार, पूर्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनिल ठाकुर, अनिकेत वानवे और डॉ. अमीरा सहित कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।