झौल में बावड़ी से पानी भरने के लिए लगाई टर्न
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बढ़ती गर्मी के कारण जिला के प्राकृतिक स्रोतों का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। वहीं, आईपीएच विभाग भी कई जगहों में सुचारु पेयजल आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। नतीजतन लोग प्राकृतिक पेयजल स्रोतों का रूख कर रहे हैं। ऐसे में बावड़ियों का जल स्तर पर भी कम हो रहा है। कम जलस्तर की समस्या को देखते हुए झौल में एक बावड़ी से एक दिन में एक परिवार को पानी भरने की अनुमति दी गई है। आईपीएच सप्लाई यहां पर तीन सप्ताह से ठप है। खराहल घाटी के झौल गांव के बाशिंदों ने पानी के घटे हुए जलस्तर को लेकर पानी भरने के लिए टर्न लगाई है। जिसके बाद गांव की चाशणी बावड़ी में एक दिन में सिर्फ एक ही परिवार पानी भरेगा। वहीं दूसरे परिवार की बारी अगले दिन आएगी। इस तरह से गांव के 14 परिवार बारी-बारी से बावड़ी से पानी भरेंगे। ग्रामीणों ने यह निर्णय बावड़ी में पानी भरने के लिए लग रही लाइनों को देखकर लिया है। इसके लिए बाकायदा खराहल घाटी की सेउगी पंचायत के झौल गांव के बाशिंदों ने एक बैठक का आयोजन किया। जिसमें यह निर्णय लिया है।
ग्रामीण राजेंद्र कुमार, तोत राम, सुरेश कुमार, चंदसेन, वेद राम, हीरे राम, वेद प्रकाश और महादेव युवक मंडल के प्रधान नीरत राम शर्मा ने कहा कि विभाग को पानी की समस्या को लेकर अवगत करवाया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे पहले विभाग यह तर्क देता रहा सेउगी में पानी का स्टोर टैंक फटा हुआ है, लेकिन अब टैंक की मरम्मत कर ठीक किया है। अब भी पानी नहीं आ रहा है। चाशणी बावड़ी में पानी भरने के लिए टर्न लगानी पड़ी है। ग्रामीणों ने विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द पानी की आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो खाली बर्तनों से साथ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
उधर, इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत सेउगी के प्रधान नरेश ठाकुर ने कहा कि मामले को लेकर आईपीएच विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी। वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता सेसराम आजाद ने कहा कि पानी की समस्या को जल्द दूर किया जाएगा। कर्मचारियों को इसके लिए निर्देश दिए जाएंगे। गांव से थोड़ी दूरी पर स्थित अन्य बावड़ी में भी काफी कम मात्रा में पानी रह गया है। यहां से लोग पीने के लिए पानी जुटा रहे हैं। लोगों को नहाना, कपड़े धोना, बाथरूम और मवेशियों को पानी पिलाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। बड़ी मुश्किल से लोग पीने का पानी जुटा रहे हैं। सेउगी पंचायत के झौल गांव में पिछले तीन सप्ताह से नल सूखे पड़े हैं। सेउगी वाटर टैंक से पाइप लाइन में पानी नहीं आया है। झौल गांव से आगे पड़ने वाले गांवों में पानी चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के पास पेयजल का बावड़ी एक ही स्रोत बचा है। बावड़ी का जलस्तर इतना कम रह गया है कि इसमें 10 लीटर पानी भरने में काफी समय लग रहा है। एक परिवार अगर पूरा दिन पानी भरे तो मुश्किल से चार-पांच ड्रम पानी ही इकट्ठा कर पाएगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक लोग खेतों में सिंचाई के लिए पेयजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है। विभाग के अधिकारियों को मौका कर ऐसे लोगों पर लगाम लगानी चाहिए।