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Kullu News: सैकड़ों घरों को राख का ढेर बना चुके हैं घास के पड़ाछे
Fri, 16 Jan 2026 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 16 Jan 2026 10:23 PM IST
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कुल्लू के ग्रामीण इलाकों में घर के समीप घास के कोठे बन रहे हैं आग लगने की वजह
जिले में 25 वर्षों में सैकड़ों मकान हुए राख, सरकार-प्रशासन भी नहीं बना पाए ठोस नीति
अमीचंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। जिले के दूरदराज गांवों में घर के पास घास के पड़ाछे अब भी आम दृश्य हैं लेकिन यही छोटे से भंडार लगातार सैकड़ों घरों को राख बना चुके हैं।
पिछले 25 वर्षों में जिले के गांवों में आग ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। फिर भी लोग घास को घर और गौशाला के पास रखने से गुरेज नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अगर घास और लकड़ी को गांव से दूर नहीं रखा गया तो अग्निकांड की घटनाओं का सिलसिला जारी रहेगा।
समय के साथ लोगों को घास को घर और गौशाला से दूर लगाना चाहिए। 2005 से अब तक जिला कुल्लू में आग की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद भी सरकार और प्रशासन इनसे निपटने के लिए कोई ठोस पहल और नीति नहीं बनाई पाई है।
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जिले में अब तक हुए अग्निकांड
साल 2005 में मणिकर्ण शिल्ला में लगी आग भीषण अग्निकांड में 30 घर स्वाह हुए। इसके अलावा 2006 में मलाणा गांव में आग से 100 से अधिक घर जले। 2007 में बंजार के मोहनी में आग से 90 घर और गोशालाएं स्वाह हो गईं। 2007 में भुंतर में छह से अधिक दुकानें राख हुईं। मलाणा में 2008 में आग लगने से 148 घर स्वाह हुए। 2008 में मनाली में का सोलंग गांव राख हुआ। 2009 में निरमंड के जुआगी गांव 30 घर जल गए। 2011 में भुंतर में चार दुकानें, साल 2014 में शांघड़ में चार मकान, 2015 में कोटला में 40 मकान, 2016 गाहर में 9 मकान, बटाहर सरसई में तीन घर स्वाह हुए। 2021 को मलाणा में 16 मकान, मझाण 12 और 2023 में बंजार पुराने बस अड्डा में 9 दुकानें और 4 मकान राख। जनवरी 2025 को बंजार के तांदी गांव में 17 मकान और छह गोशालाएं जलीं। नवंबर 2025 में झनियार में 16 मकान राख हुए। कई देवी-देवताओं के रथ और मंदिर भी इसमें स्वाह हो गए हैं।
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जिले में आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। लोग अपने घरों में घास और लकड़ी का भंडारण न करें। गांव से दूर घास और लकड़ी का भंडारण किया जाए। गांव में पानी के स्टोरज टैंक का निर्माण करें। - प्रेम भारद्धाज, दमकल अधिकारी कुल्लू
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जिले में 25 वर्षों में सैकड़ों मकान हुए राख, सरकार-प्रशासन भी नहीं बना पाए ठोस नीति
अमीचंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। जिले के दूरदराज गांवों में घर के पास घास के पड़ाछे अब भी आम दृश्य हैं लेकिन यही छोटे से भंडार लगातार सैकड़ों घरों को राख बना चुके हैं।
पिछले 25 वर्षों में जिले के गांवों में आग ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। फिर भी लोग घास को घर और गौशाला के पास रखने से गुरेज नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अगर घास और लकड़ी को गांव से दूर नहीं रखा गया तो अग्निकांड की घटनाओं का सिलसिला जारी रहेगा।
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समय के साथ लोगों को घास को घर और गौशाला से दूर लगाना चाहिए। 2005 से अब तक जिला कुल्लू में आग की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद भी सरकार और प्रशासन इनसे निपटने के लिए कोई ठोस पहल और नीति नहीं बनाई पाई है।
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जिले में अब तक हुए अग्निकांड
साल 2005 में मणिकर्ण शिल्ला में लगी आग भीषण अग्निकांड में 30 घर स्वाह हुए। इसके अलावा 2006 में मलाणा गांव में आग से 100 से अधिक घर जले। 2007 में बंजार के मोहनी में आग से 90 घर और गोशालाएं स्वाह हो गईं। 2007 में भुंतर में छह से अधिक दुकानें राख हुईं। मलाणा में 2008 में आग लगने से 148 घर स्वाह हुए। 2008 में मनाली में का सोलंग गांव राख हुआ। 2009 में निरमंड के जुआगी गांव 30 घर जल गए। 2011 में भुंतर में चार दुकानें, साल 2014 में शांघड़ में चार मकान, 2015 में कोटला में 40 मकान, 2016 गाहर में 9 मकान, बटाहर सरसई में तीन घर स्वाह हुए। 2021 को मलाणा में 16 मकान, मझाण 12 और 2023 में बंजार पुराने बस अड्डा में 9 दुकानें और 4 मकान राख। जनवरी 2025 को बंजार के तांदी गांव में 17 मकान और छह गोशालाएं जलीं। नवंबर 2025 में झनियार में 16 मकान राख हुए। कई देवी-देवताओं के रथ और मंदिर भी इसमें स्वाह हो गए हैं।
जिले में आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। लोग अपने घरों में घास और लकड़ी का भंडारण न करें। गांव से दूर घास और लकड़ी का भंडारण किया जाए। गांव में पानी के स्टोरज टैंक का निर्माण करें। - प्रेम भारद्धाज, दमकल अधिकारी कुल्लू