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होटलों की ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी से कम
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पतलीकूहल (कुल्लू)। विश्व-विख्यात पर्यटन नगरी मनाली में इन दिनों सैलानियों की तादाद न के बराबर रह गई है। मनाली में रोजाना 200 पर्यटक वाहन ही पहुंच रहे हैं। इससे पहले जुलाई से अगस्त में इन वाहनों की संख्या 2000 से 2500 रोज हुआ करती थी।
जिले के मणिकर्ण, रोहतांग दर्रा, अटल टनल व जलोड़ी दर्रे में गिने चुने सैलानी पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की घटती संख्या को देखते हुए मनाली में होटलों की ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी से भी कम आ गई है। ऐसे में मनाली में होटल पूरी तरह से खाली चले हुए हैं। आलम यह है कि होटलियरों को स्टाफ के खर्च के साथ बिजली-पानी के बिल तक का भुगतान करना मुश्किल हो चला है। कुछ रेस्तरां में भी टूरिस्ट न आने से स्टाफ की कमी की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले दो माह तक मनाली में सैलानियों का टोटा ही रहेगा। इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि बरसात के मौसम में पहाड़ों में बादल फटने के अलावा बाढ़ व भारी भूस्खलन की आशंका के चलते सैलानी मनाली जैसे पहाड़ी स्टेशन में सैर सपाटे के बजाय घरों में रहने को तरजीह देते हैं। 15 जुलाई और 15 अगस्त के बीच हिंदू परंपरा के मुताबिक शादियों पर भी अमूमन रोक रहती है। इस दौरान मनाली में साहसिक पर्यटन गतिविधियों भी बंद रहती हैं। मनाली होटलियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूपराम ठाकुर का कहना है कि बरसात के दिनों में मनाली में पर्यटक आते हैं। इस बार इसके मुकाबले बहुत कम है। जून माह के बाद शुरू हुए पर्यटन सीजन को देखते हुए इस बार सीजन के अगस्त माह तक चलने की संभावना था। लेकिन जुलाई के आखिरी सप्ताह में बरसात की तबाही व भारी भूस्खलन के कारण सैलानी कुल्लू-मनाली आने से सहम गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में फिर सैलानी उमड़ने लगेंगे। हालांकि कोरोना से भी मनाली के पर्यटन को बड़ा झटका लगा है।
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जिले के मणिकर्ण, रोहतांग दर्रा, अटल टनल व जलोड़ी दर्रे में गिने चुने सैलानी पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की घटती संख्या को देखते हुए मनाली में होटलों की ऑक्यूपेंसी पांच फीसदी से भी कम आ गई है। ऐसे में मनाली में होटल पूरी तरह से खाली चले हुए हैं। आलम यह है कि होटलियरों को स्टाफ के खर्च के साथ बिजली-पानी के बिल तक का भुगतान करना मुश्किल हो चला है। कुछ रेस्तरां में भी टूरिस्ट न आने से स्टाफ की कमी की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले दो माह तक मनाली में सैलानियों का टोटा ही रहेगा। इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि बरसात के मौसम में पहाड़ों में बादल फटने के अलावा बाढ़ व भारी भूस्खलन की आशंका के चलते सैलानी मनाली जैसे पहाड़ी स्टेशन में सैर सपाटे के बजाय घरों में रहने को तरजीह देते हैं। 15 जुलाई और 15 अगस्त के बीच हिंदू परंपरा के मुताबिक शादियों पर भी अमूमन रोक रहती है। इस दौरान मनाली में साहसिक पर्यटन गतिविधियों भी बंद रहती हैं। मनाली होटलियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूपराम ठाकुर का कहना है कि बरसात के दिनों में मनाली में पर्यटक आते हैं। इस बार इसके मुकाबले बहुत कम है। जून माह के बाद शुरू हुए पर्यटन सीजन को देखते हुए इस बार सीजन के अगस्त माह तक चलने की संभावना था। लेकिन जुलाई के आखिरी सप्ताह में बरसात की तबाही व भारी भूस्खलन के कारण सैलानी कुल्लू-मनाली आने से सहम गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में फिर सैलानी उमड़ने लगेंगे। हालांकि कोरोना से भी मनाली के पर्यटन को बड़ा झटका लगा है।
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