दशहरा के लिए देवताओं ने किया कूच
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देव समागम के लिए बंजार, आनी और अन्य क्षेत्रों के देवी-देवता सोमवार को लाव लश्कर के साथ कूच कर गए हैं। दशहरा उत्सव के दौरान देवता सात दिन तक ढालपुर मैदान में अस्थायी शिविरों में रहेंगे। हालांकि, उत्सव में आने के बाद देवता सबसे पहले भगवान रघुनाथ से मिलन करेंगे। बंजार घाटी के आराध्य देवता श्रृंगा ऋषि चैंहणी, मार्केंडय ऋषि बलागाड़, शंगचूल देवता टील, रियालूनाग मोहनी, देवता पझारी बाहू, पंचालिका माता पुजाली, खुड्डीजल देवता तथा महावीर देवता बलागाड़, ईश्वर महादेव पलाहच, बुंगडू महादेव गोशाला, लक्ष्मीनारायण कलवारी, माता गाडादुर्गा, देवी भागासिद्ध, छमाहणी नारायण सहित अन्य देवता देवालयों से निकल चुके हैं।
हालांकि, इनमें से कुछ देवता भक्तों के घर बुलावे पर भी जाएंगे। देवी-देवता कारदार संघ बंजार के अध्यक्ष सत्यदेव नेगी ने कहा कि देवी-देवता अपने देवालय से देव महाकुंभ में शामिल होने के लिए निकल चुके हैं। देवता ढोल नगाड़ों तथा लाव लश्कर के साथ ढालपुर मैदान पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव में शामिल होने की परंपरा का देवता सदियों से निभा रहे हैं। दशहरा उत्सव के दौरान देवी-देवता तथा कारकून तंबुओं में रहकर परंपराओं निर्वहन करते हैं। सभी देवताओं के बैठने के अपने-अपने स्थान हैं।