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Kullu News: आराध्य नरसिंह की जलेब में झूमे देवलू, बांधा सुरक्षा चक्र
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कुल्लू दशहरा उत्सव में मौहल्ला के मौके पर निकले देवी-देवताओ और देवलू।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन सोमवार को महाराजा कोठी के आराध्य देवता भगवान नरसिंह की जिया जलेब निकाली गई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं ने भाग लिया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर निकली जलेब में देवलुओं के नृत्य से ढालपुर का माहौल भक्तिमय हो गया। इस दौरान कुल्लू की प्राचीन देव परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
पांचवीं जलेब में पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता और हुरगू नारायण, लोट के वीर कैला, कमांद के वीर कैला, पीज के अजयपाल और खल्याणी के पांचवीर बराधी सहित अन्य देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस दौरान देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। देव परंपरा के अनुसार, भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह नरसिंह की पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। पालकी के आगे-आगे नरसिंह की घोड़ी चलती रही।
कुल्लू दशहरा उत्सव में जलेब का विशेष धार्मिक महत्व है। देव मान्यता के अनुसार, जलेब के माध्यम से मेले के मैदान के चारों ओर सुरक्षा चक्र बांधा जाता है। इसका उद्देश्य मेले में सुख-शांति बनाए रखना और किसी भी अनहोनी से रक्षा करना है। मान्यता है कि यह सुरक्षा चक्र बुरी शक्तियों के प्रभाव से मेले की रक्षा करता है। भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि जलेब के दौरान मेले के मैदान के चारों ओर सुरक्षा सूत्र बांधने की परंपरा निभाई जाती है। यह कुल्लू की सदियों पुरानी देव आस्था और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा है। संवाद
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पांचवीं जलेब में पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता और हुरगू नारायण, लोट के वीर कैला, कमांद के वीर कैला, पीज के अजयपाल और खल्याणी के पांचवीर बराधी सहित अन्य देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस दौरान देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। देव परंपरा के अनुसार, भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह नरसिंह की पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। पालकी के आगे-आगे नरसिंह की घोड़ी चलती रही।
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कुल्लू दशहरा उत्सव में जलेब का विशेष धार्मिक महत्व है। देव मान्यता के अनुसार, जलेब के माध्यम से मेले के मैदान के चारों ओर सुरक्षा चक्र बांधा जाता है। इसका उद्देश्य मेले में सुख-शांति बनाए रखना और किसी भी अनहोनी से रक्षा करना है। मान्यता है कि यह सुरक्षा चक्र बुरी शक्तियों के प्रभाव से मेले की रक्षा करता है। भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि जलेब के दौरान मेले के मैदान के चारों ओर सुरक्षा सूत्र बांधने की परंपरा निभाई जाती है। यह कुल्लू की सदियों पुरानी देव आस्था और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा है। संवाद
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