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देव अनुमति बिना नहीं होगी देवस्थलों से छेड़छाड़

Thu, 19 May 2016 10:22 PM IST
कुल्लू
कुल्लू Updated Thu, 19 May 2016 10:22 PM IST
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dev jagti
कुल्लू के रघुनाथ मदिंर में जगती के दौरान पहुंचें घाटी के देवी-देवताओं के निशान। - फोटो : अमर उजाला

जिला कुल्लू में देवस्थलों से हो रही छेड़छाड़ से देवी-देवता नाराज चल रहे हैं। ऐसे में देवभूमि कुल्लू के देवी-देवताओं ने रघुनाथपुर में भगवान रघुनाथ के दरबार में देव आदेशों अनुसार आयोजित देव जगती के दौरान हरियानों को आगाह किया है कि देव अनुमति के बिना देवस्थलों से छेड़छाड़ नहीं होगी। रघुनाथपुर में देव जगती करने के आदेश नीणू गांव के देवता नारद मुनि ने दशहरा उत्सव के दौरान उस समय दिए थे, जब 26 अक्तूबर 2015 को भूकंप से उतरी भारत और नेपाल हिल गया था। उस समय भूकंप होने से पहले देवता नारदमुनी ने किसी अप्रिय घटना होने की भविष्यवाणी गूर के माध्यम से की थी।

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भगवान रघुनाथ की नगरी रघुनाथपुर में वीरवार को देव जगती का आयोजन नीणू के देवता नारद मुनी के आदेश पर किया गया। इसके लिए देवता ने सभी अठारह करडूओं को एक स्थान पर इकट्ठा होकर घाटी में आने वाली विपदाओं से निपटने के लिए देव सलाह मशविरा करने को कहा था। देव आदेशों की पालन करते हुए भगवान रघुनाथ के दर में वीरवार को दर्जनों देवी-देवताओं ने भाग लिया। वीरवार को भगवान रघुनाथ के दरबार में हुई देवसभा में जिला कुल्लू के देवी-देवता अपने देव निशान घंटी और धड़छ में विराजमान हुए। प्रात:काल भगवान रघुनाथ की पूजा-अर्चना करने के बाद जगती पूछ का सिलसिला आरंभ हुआ। देव निशान के साथ पहुंचे देवी-देवताओं के गूर-पुजारी क्रमवार बैठे। इसके बाद भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने देव कार्यक्रम का सिलसिला आरंभ किया। इस दौरान छड़ीबरदार ने देवी-देवताओं के पास बारी-बारी से पूछ डाली गई। पूछ के दौरान देवताओं ने आगाह किया है कि देवस्थलों से छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि देवता नारद के आदेश पर वीरवार को सभी देवी-देवताओं को रघुनाथ मंदिर बुलाया गया। इसमें कारदार संघ ने भी अपनी सहमति जताई है। ढालपुर मैदान में सौंदर्यीकरण का कार्य एक बार किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रदेश सरकार से भी बात की जाएगी। देव स्थल ढालपुर में जो भी कार्य किए जाने हैं वह एक बार में ही किए जाएं। वहीं देवपरंपरा के साथ इस स्थान की शुद्धि की जाए। उसके उपरांत यहां पर कोई भी सौंदर्यीकरण कार्य न किया जाए।

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