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करोड़ाें का सेस, फिर भी पशु लावारिस : हितेश्वर
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जिले में भी बढ़ रही लावारिस मवेशियों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इन्हें कौन छोड़ रहा है, किसी को कोई पता नहीं है। शुक्रवार को कुल्लू में पूर्व जिला परिषद सदस्य हितेश्वर सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि लावारिस पशुओं के कारण सड़कों में हादसे हो रहे हैं। इसमें पशुओं के साथ लोगों की भी मौत हो रही है। साथ ही लावारिस पशु फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
2010 और 11 में पशुपालन विभाग की मदद से पशुओं की टैगिंग की गई, बावजूद कुछ नहीं हो रहा है। गोसदन बनाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिले में करीब 500 लावारिस पशु घूम रहे हैं। प्रदेश सरकार पशुओं के संरक्षण के लिए शराब पर सेस वसूल रही है। इससे करोड़ों रुपये एकत्रित हो रहे हैं, फिर भी पशुओं का संरक्षण नहीं हो रहा है। कहा कि जिले में एक ऐसी जगह देखनी चाहिए जहां बड़ा गोसदन बनाया जाए और वेटरनरी विभाग की सुविधा हो।
इसके लिए सामाजिक संगठनों, जिला प्रशासन और सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। वहीं, रोट पंचायत के प्रधान राजेंद्र पाल ने कहा कि पंचायत के पास गोसदन के लिए धन की कमी रहती है। गोसदन खोलना और चलाना आसान नहीं है। बजौरा पंचायत के पूर्व प्रधान गोपी चंद शर्मा ने कहा कि लावारिस पशु के लिए 700 रुपये की राशि कम है। लावारिस पशुओं के लिए सरकार और प्रशासन को गंभीर होने की जरूरत है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इन्हें कौन छोड़ रहा है, किसी को कोई पता नहीं है। शुक्रवार को कुल्लू में पूर्व जिला परिषद सदस्य हितेश्वर सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि लावारिस पशुओं के कारण सड़कों में हादसे हो रहे हैं। इसमें पशुओं के साथ लोगों की भी मौत हो रही है। साथ ही लावारिस पशु फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
2010 और 11 में पशुपालन विभाग की मदद से पशुओं की टैगिंग की गई, बावजूद कुछ नहीं हो रहा है। गोसदन बनाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिले में करीब 500 लावारिस पशु घूम रहे हैं। प्रदेश सरकार पशुओं के संरक्षण के लिए शराब पर सेस वसूल रही है। इससे करोड़ों रुपये एकत्रित हो रहे हैं, फिर भी पशुओं का संरक्षण नहीं हो रहा है। कहा कि जिले में एक ऐसी जगह देखनी चाहिए जहां बड़ा गोसदन बनाया जाए और वेटरनरी विभाग की सुविधा हो।
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इसके लिए सामाजिक संगठनों, जिला प्रशासन और सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। वहीं, रोट पंचायत के प्रधान राजेंद्र पाल ने कहा कि पंचायत के पास गोसदन के लिए धन की कमी रहती है। गोसदन खोलना और चलाना आसान नहीं है। बजौरा पंचायत के पूर्व प्रधान गोपी चंद शर्मा ने कहा कि लावारिस पशु के लिए 700 रुपये की राशि कम है। लावारिस पशुओं के लिए सरकार और प्रशासन को गंभीर होने की जरूरत है। संवाद
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