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Kullu News: देहुरी में निशान डाहुली के साथ मनाई बूढ़ी दिवाली
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Budhi Diwali celebrated with Nishan Dahuli in Dehuri
- फोटो : Kullu
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में देवी-देवताओं के सम्मान में बूढ़ी दिवाली मनाई गई। रातभर सदियों पुरानी परंपरा को निभाकर बूढ़ी दिवाली का आयोजन हुआ।
खुडीजल की देहुरी में बूढ़ी दिवाली देवता की गैर मौजूदगी में निशान डाहुली के साथ मनाई गई। देवता खुडीजल इन दिनों सुकीसिंअ के दौर से लौट रहे हैं। अभी देवता का रथ जाबन पहुंचा है। देवता खुडीजल मौजूद न होने पर डाहुली से सभी देव परंपराओं को निभाया गया।
इस दौरान मंदिर परिसर में घास (मूंज) की बनी रस्सी को तैयार किया था। रस्सी से कोट और देहुरी गांव के ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में तीन बार परिक्रमा की। देवता के पुजारी शशि कांत शर्मा और गूर चमन लाल ने कहा कि इस मौके पर पुजारी प्रथा के अनुसार 90 मुजारे से देवता खुडीजल महाराज की पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री को एकत्रित करते हैं। इसमें जौ, गैहूं, मक्की और घी शामिल है।
बूढ़ी दिवाली के दूसरे दिन वीरवार को देव स्नान के बाद झाले का आयोजन किया गया। राजा बलि और बामन अवतार से संबंधित काव गए गए। इसके अलावा बाह्य सराज के कुईंर में देवता ब्यास ऋषि की सम्मान में बूढ़ी दिवाली मनाई गई। इस दौरान चोतरू नाग और पटारनी नाग देवता भी मौजूद रहे। कोट बूढ़ी दिवाली में देवता कोट भझारी और बंजार के बाहू के देवता भझारी का भव्य देव मिलन हुआ है। इस दौरान देवनृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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खुडीजल की देहुरी में बूढ़ी दिवाली देवता की गैर मौजूदगी में निशान डाहुली के साथ मनाई गई। देवता खुडीजल इन दिनों सुकीसिंअ के दौर से लौट रहे हैं। अभी देवता का रथ जाबन पहुंचा है। देवता खुडीजल मौजूद न होने पर डाहुली से सभी देव परंपराओं को निभाया गया।
इस दौरान मंदिर परिसर में घास (मूंज) की बनी रस्सी को तैयार किया था। रस्सी से कोट और देहुरी गांव के ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में तीन बार परिक्रमा की। देवता के पुजारी शशि कांत शर्मा और गूर चमन लाल ने कहा कि इस मौके पर पुजारी प्रथा के अनुसार 90 मुजारे से देवता खुडीजल महाराज की पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री को एकत्रित करते हैं। इसमें जौ, गैहूं, मक्की और घी शामिल है।
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बूढ़ी दिवाली के दूसरे दिन वीरवार को देव स्नान के बाद झाले का आयोजन किया गया। राजा बलि और बामन अवतार से संबंधित काव गए गए। इसके अलावा बाह्य सराज के कुईंर में देवता ब्यास ऋषि की सम्मान में बूढ़ी दिवाली मनाई गई। इस दौरान चोतरू नाग और पटारनी नाग देवता भी मौजूद रहे। कोट बूढ़ी दिवाली में देवता कोट भझारी और बंजार के बाहू के देवता भझारी का भव्य देव मिलन हुआ है। इस दौरान देवनृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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