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विंटर कार्निवल, दशहरा उत्सव में लालड़ी नृत्य पर लगे रोक : गौतम
Fri, 26 Dec 2025 10:19 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 26 Dec 2025 10:19 PM IST
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बोले- देव संस्कृति को पर्यटन के लिए तमाशा बनाने की साजिश बर्दाश्त नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौतम ठाकुर ने जिला प्रशासन आरोप लगाया है कि देव-परंपराओं से जुड़े लालड़ी नृत्य को सड़कों और व्यावसायिक मंचों पर कराना हिमाचल की आत्मा से खिलवाड़ है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रशासन ने आग्रह किया है कि तुरंत प्रभाव से विंटर कार्निवल मनाली, अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा और अन्य सरकारी व गैर सरकारी आयोजनों में सार्वजनिक स्थलों पर लालड़ी नृत्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान उसकी देव संस्कृति और आस्था से है, न कि उसे पर्यटन के नाम पर तमाशा बनाने से। लालड़ी नृत्य कोई मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि देव-रीति से जुड़ा पवित्र अनुष्ठान है। इसे परंपरागत रूप से देवालयों और देवकार्यों में ही किया जाता रहा है। विडंबना है कि ऊझी घाटी में शीत ऋतु के दौरान देवालयों के कपाट बंद रहते हैं और भवन निर्माण पर रोक होती है। रेडियो, टीवी, डेक, टेपरिकॉर्डर, डीजे जैसे गाने-बजाने के साधनों का प्रयोग तक वर्जित माना जाता है लेकिन उसी समय कुल्लू प्रशासन लालड़ी नृत्य को मालरोड और सड़कों पर करवाकर देव मर्यादाओं का खुला उल्लंघन करता है।
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आरोप लगाया कि कुल्लू प्रशासन देव संस्कृति को जानबूझकर पर्यटन उत्पाद में बदलने का काम कर रहा है। यह न केवल आस्था का अपमान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ सांस्कृतिक धोखा भी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौतम ठाकुर ने जिला प्रशासन आरोप लगाया है कि देव-परंपराओं से जुड़े लालड़ी नृत्य को सड़कों और व्यावसायिक मंचों पर कराना हिमाचल की आत्मा से खिलवाड़ है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रशासन ने आग्रह किया है कि तुरंत प्रभाव से विंटर कार्निवल मनाली, अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा और अन्य सरकारी व गैर सरकारी आयोजनों में सार्वजनिक स्थलों पर लालड़ी नृत्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान उसकी देव संस्कृति और आस्था से है, न कि उसे पर्यटन के नाम पर तमाशा बनाने से। लालड़ी नृत्य कोई मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि देव-रीति से जुड़ा पवित्र अनुष्ठान है। इसे परंपरागत रूप से देवालयों और देवकार्यों में ही किया जाता रहा है। विडंबना है कि ऊझी घाटी में शीत ऋतु के दौरान देवालयों के कपाट बंद रहते हैं और भवन निर्माण पर रोक होती है। रेडियो, टीवी, डेक, टेपरिकॉर्डर, डीजे जैसे गाने-बजाने के साधनों का प्रयोग तक वर्जित माना जाता है लेकिन उसी समय कुल्लू प्रशासन लालड़ी नृत्य को मालरोड और सड़कों पर करवाकर देव मर्यादाओं का खुला उल्लंघन करता है।
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आरोप लगाया कि कुल्लू प्रशासन देव संस्कृति को जानबूझकर पर्यटन उत्पाद में बदलने का काम कर रहा है। यह न केवल आस्था का अपमान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ सांस्कृतिक धोखा भी है।