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मिड-डे मील वर्करों के लिए बनाई जाए नीति : सरिता

Mon, 15 Jun 2026 10:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 10:58 PM IST
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A policy should be formulated for mid-day meal workers: Sarita
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। सरकार मिड-डे मील वर्करों की अनदेखी कर रही है। वर्करों के लिए कोई स्थायी नीति बनी है, जिसके कारण उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। वर्तमान में महज 5000 रुपये मासिक मानदेय मिल रहा है, जिससे परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। वर्करों ने सरकार से स्थायी नीति बनाने तथा मानदेय में बढ़ोतरी करने की मांग उठाई है।
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मिड-डे मील वर्कर सरिता, शकुंतला, मीरा और प्रेमदासी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने उनके मानदेय में केवल 500 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की है। अभी तक इसकी अधिकारिक अधिसूचना भी जारी नहीं की है। कहा कि वे वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रही हैं। बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी सेवाओं और भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। संवाद
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