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....कहीं नाराज तो नहीं हो गए देवता
Kullu
Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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सैंज (कुल्लू)। सैंज के पाशी में हुई आगजनी की घटना को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वैज्ञानिक पहलु से जोड़कर देखा जाए तो आगजनी का कारण मंदिर में जल रहे दीपक की आग भी हो सकता है जबकि धार्मिक दृष्टि से घटना को देवता की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। लोगों के मुताबिक सैंज घाटी के देवता बिजली परियोजनाओं के निर्माण के दौरान देव स्थलों से हो रही छेड़खानी से नाराज हैं। कई मौकों पर देवताओं ने बाकायदा इस बारे आगाह भी किया है।
पाशी गांव में देवता जमलू का नया रथ बनना था। इसके लिए सोमवार को देवपूछ होनी थी। मझाण के देवता खुनसू नाग भी विशेष तौर पर इस समारोह में आमंत्रित किए थे। लेकिन, देव पूछ से पहले ही देवता का रथ आग में समा गया। मंदिर समेत दोनों देवताओं के देवरथ जलना घाटी वासी शुभ संकेत नहीं मान रहे। देवलुओं का तर्क है कि हो सकता है इलाके में कोई बड़ी विपदा आने वाली थी, जिसे देवताओं ने अपने ऊपर ले लिया।
देवता के गुर दौलत राम ने कहा कि नए रथ निर्माण के लिए देवपूछ होनी थी। उनके अनुसार हो सकता है कि देवता रुष्ट हों। इस वजह से आग लगी। उधर देवलुओं का कहना है कि घाटी में बन रही बिजली परियोजनाओं से धार्मिक स्थल भी खंडित हो रहे हैं। पवित्र मानी जाने वाली नदियां रासयन युक्त पानी से दूषित है। देवलु ढालु राम, जगरनाथ, भीमी राम, गिरधारी लाल और केशव कहते हैं कि ऐसी घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं देव नियमों का टूटना भी वजह बन रही है। परियोजना के निर्माण से देवता नाराज चल रहे हैं। कई बार देवताओं ने इस बारे लोगों को आगाह भी किया है।
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पाशी गांव में देवता जमलू का नया रथ बनना था। इसके लिए सोमवार को देवपूछ होनी थी। मझाण के देवता खुनसू नाग भी विशेष तौर पर इस समारोह में आमंत्रित किए थे। लेकिन, देव पूछ से पहले ही देवता का रथ आग में समा गया। मंदिर समेत दोनों देवताओं के देवरथ जलना घाटी वासी शुभ संकेत नहीं मान रहे। देवलुओं का तर्क है कि हो सकता है इलाके में कोई बड़ी विपदा आने वाली थी, जिसे देवताओं ने अपने ऊपर ले लिया।
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देवता के गुर दौलत राम ने कहा कि नए रथ निर्माण के लिए देवपूछ होनी थी। उनके अनुसार हो सकता है कि देवता रुष्ट हों। इस वजह से आग लगी। उधर देवलुओं का कहना है कि घाटी में बन रही बिजली परियोजनाओं से धार्मिक स्थल भी खंडित हो रहे हैं। पवित्र मानी जाने वाली नदियां रासयन युक्त पानी से दूषित है। देवलु ढालु राम, जगरनाथ, भीमी राम, गिरधारी लाल और केशव कहते हैं कि ऐसी घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं देव नियमों का टूटना भी वजह बन रही है। परियोजना के निर्माण से देवता नाराज चल रहे हैं। कई बार देवताओं ने इस बारे लोगों को आगाह भी किया है।
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