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फागली उत्सव में विवाद पर किया प्रदर्शन
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। बंजार उपमंडल की थाटीबीड़ पंचायत में फागली उत्सव में हुए विवाद के विरोध में मंगलवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के बैनर तले प्रदर्शन किया। इसमें गोपालपुर, थाटीबीड़, चकुरठा तथा कोटला पंचायत के लोगों ने भाग लिया।
ढालपुर से कॉलेज रोड होते हुए उपायुुुक्त कार्यालय तक एक रैली भी निकाली गई। रैली के दौरान एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग भी उठाई गई। उपायुक्त के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र राजपूत ने कहा कि देव कामदारों पर लगाए आरोप निराधार हैं। इस उत्सव में सभी जाति तथा समुदाय के लोग शामिल होते हैं। जिस नरगिस के फूलों के गुच्छे की बात की जा रही है, उसे केवल दलित समुदाय के व्यक्ति को ही फेंकने का अधिकार है। ऐसे में भेदभाव का प्रश्न ही नहीं उठता। देव कामदारों ने उसे पीटने का आदेश दिया यह गलत है, बल्कि मेला कमेटी के लोगों ने उस व्यक्ति को भीड़ में हो रही हाथापाई से सुरक्षित निकाला। बिना किसी आधार पर देव कामदारों पर एससी-एसटी एक्ट लगाया है। इस तरह के कानून पर संशोधन किया जाना चाहिए। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। पंचायत के पूर्व उप प्रधान दिवान वर्मा ने कहा कि किसी जाति समुदाय से कोई विरोध नहीं है। देव कामदारों को बिना वजह फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ लोगों ने एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग किया है। इसमें बेगुनाह देव कामदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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कुल्लू। बंजार उपमंडल की थाटीबीड़ पंचायत में फागली उत्सव में हुए विवाद के विरोध में मंगलवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के बैनर तले प्रदर्शन किया। इसमें गोपालपुर, थाटीबीड़, चकुरठा तथा कोटला पंचायत के लोगों ने भाग लिया।
ढालपुर से कॉलेज रोड होते हुए उपायुुुक्त कार्यालय तक एक रैली भी निकाली गई। रैली के दौरान एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग भी उठाई गई। उपायुक्त के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र राजपूत ने कहा कि देव कामदारों पर लगाए आरोप निराधार हैं। इस उत्सव में सभी जाति तथा समुदाय के लोग शामिल होते हैं। जिस नरगिस के फूलों के गुच्छे की बात की जा रही है, उसे केवल दलित समुदाय के व्यक्ति को ही फेंकने का अधिकार है। ऐसे में भेदभाव का प्रश्न ही नहीं उठता। देव कामदारों ने उसे पीटने का आदेश दिया यह गलत है, बल्कि मेला कमेटी के लोगों ने उस व्यक्ति को भीड़ में हो रही हाथापाई से सुरक्षित निकाला। बिना किसी आधार पर देव कामदारों पर एससी-एसटी एक्ट लगाया है। इस तरह के कानून पर संशोधन किया जाना चाहिए। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। पंचायत के पूर्व उप प्रधान दिवान वर्मा ने कहा कि किसी जाति समुदाय से कोई विरोध नहीं है। देव कामदारों को बिना वजह फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ लोगों ने एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग किया है। इसमें बेगुनाह देव कामदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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