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इंसान की सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर देता है नशा
Updated Wed, 18 Jul 2018 10:14 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : amarujala
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कुल्लू। हिमाचल के नंबर वन अखबार अमर उजाला की ओर से बुधवार को ललित महाजन सरस्वती विद्या मंदिर बाशिंग स्कूल में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। जबकि, क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के डी एडिक्शन सेंटर प्रभारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे।
पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री ने विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि कुल्लू नशे का हब बन गया है और यह कई युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। कुल्लू में अब ऐसे नशे भी देखने को मिल रहे हैं जिनके बारे में सिर्फ किताबों में ही सुना था। लेकिन अब युवा इन नशों का इस्तेमाल करने लगे हैं। हमें इसकी वजह को समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कामयाबी हासिल करने के लिए गलत संगत से बचना जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। शातिर इसका फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इस दौरान डी एडिक्शन सेंटर प्रभारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि जिला में ड्रग एडिक्ट लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि अभी तक लोग ड्रग्स को लेकर जागरूक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नशे की तीन स्टेज होती हैं। पहली स्टेज में आदत, दूसरी स्टेज में हार्मफुल यूूज और तीसरी स्टेज डिपेंडेस होती है। तीसरी स्टेज में इंसान का वश अपने हाथों में नहीं रहता। अगर ड्रग्स एडिक्ट को ड्रग्स नहीं मिलती है तो वह बेचैन हो उठता है। नशा मिलने पर वह सामान्य होता है। ऐसी स्थिति में उसे डॉक्टर की जरूरत होती है। कार्यक्रम के दौरान अनामिका ठाकुर, गीताजंली ने भाषण के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूक किया।
एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि इस अवस्था में सही या गलत का चयन करके जिंदगी को आसान व कामयाब बनाया जा सकता है। हां कहने के बजाए न कहने में हिम्मत अधिक होनी चाहिए। ऐसे में अगर कोई दोस्त आपको नशा करने के लिए कहें तो उसे न कहें। भांग को लेकर कई लोगों ने भ्रम पालकर रखा हुआ है। वर्तमान में लड़कियां भी ड्रग्स की ओर जा रही हैं, जोकि चिंताजनक है। कहा कि युवाओं को अभी से ही सोचना पड़ेगा कि एक ड्रग्स एडिक्ट की तरह जिंदगी व्यतीत करनी है या फिर अच्छे लोगों की तरह। इसका निर्णय युवा को करना है और विद्यार्थी जीवन का यह पड़ाव ही इसके लिए सही समय है। गलत कार्य या नशे से संबंधित किसी भी सूचना के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।
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डी एडिक्शन सेंटर प्रभारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि अगर कोई युवा ड्रग्स छोड़ना चाहता है तो क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के कमरा नंबर 108 स्थित डी एडिक्शन सेंटर में आकर नशा छुड़वा सकता है। नशा छुड़वाने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। ड्रग्स एक ऐसा पदार्थ है जो व्यक्ति के सोचने, समझने की शक्ति को प्रभावित करता है। किसी भी ड्रग्स को छोड़ने के लिए दवाई की जरूरत होती है। हिम्मत व डॉक्टर के सहयोग से नशे को आसानी से छोड़ा जा सकता है।
ललित महाजन सरस्वती विद्या मंदिर बाशिंग के प्रधानाचार्य छविंद्र पाल ने कहा कि नशे के खिलाफ जंग लड़ने की जिम्मेवारी सिर्फ पुलिस की ही नहीं है। यह हम सबकी नैतिक जिम्मेवारी है। आज के समय में भी समाज में कुरीतियां मौजूद हैं जो हमारे समाज के लिए बेहद घातक हैं। एक बार नशे के चंगुल में फंस जाने के बाद युवा इससे बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि नशे से दूर रहें।
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पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री ने विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि कुल्लू नशे का हब बन गया है और यह कई युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। कुल्लू में अब ऐसे नशे भी देखने को मिल रहे हैं जिनके बारे में सिर्फ किताबों में ही सुना था। लेकिन अब युवा इन नशों का इस्तेमाल करने लगे हैं। हमें इसकी वजह को समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कामयाबी हासिल करने के लिए गलत संगत से बचना जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। शातिर इसका फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इस दौरान डी एडिक्शन सेंटर प्रभारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि जिला में ड्रग एडिक्ट लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि अभी तक लोग ड्रग्स को लेकर जागरूक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नशे की तीन स्टेज होती हैं। पहली स्टेज में आदत, दूसरी स्टेज में हार्मफुल यूूज और तीसरी स्टेज डिपेंडेस होती है। तीसरी स्टेज में इंसान का वश अपने हाथों में नहीं रहता। अगर ड्रग्स एडिक्ट को ड्रग्स नहीं मिलती है तो वह बेचैन हो उठता है। नशा मिलने पर वह सामान्य होता है। ऐसी स्थिति में उसे डॉक्टर की जरूरत होती है। कार्यक्रम के दौरान अनामिका ठाकुर, गीताजंली ने भाषण के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूक किया।
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एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि इस अवस्था में सही या गलत का चयन करके जिंदगी को आसान व कामयाब बनाया जा सकता है। हां कहने के बजाए न कहने में हिम्मत अधिक होनी चाहिए। ऐसे में अगर कोई दोस्त आपको नशा करने के लिए कहें तो उसे न कहें। भांग को लेकर कई लोगों ने भ्रम पालकर रखा हुआ है। वर्तमान में लड़कियां भी ड्रग्स की ओर जा रही हैं, जोकि चिंताजनक है। कहा कि युवाओं को अभी से ही सोचना पड़ेगा कि एक ड्रग्स एडिक्ट की तरह जिंदगी व्यतीत करनी है या फिर अच्छे लोगों की तरह। इसका निर्णय युवा को करना है और विद्यार्थी जीवन का यह पड़ाव ही इसके लिए सही समय है। गलत कार्य या नशे से संबंधित किसी भी सूचना के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।
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डी एडिक्शन सेंटर प्रभारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने कहा कि अगर कोई युवा ड्रग्स छोड़ना चाहता है तो क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के कमरा नंबर 108 स्थित डी एडिक्शन सेंटर में आकर नशा छुड़वा सकता है। नशा छुड़वाने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। ड्रग्स एक ऐसा पदार्थ है जो व्यक्ति के सोचने, समझने की शक्ति को प्रभावित करता है। किसी भी ड्रग्स को छोड़ने के लिए दवाई की जरूरत होती है। हिम्मत व डॉक्टर के सहयोग से नशे को आसानी से छोड़ा जा सकता है।
ललित महाजन सरस्वती विद्या मंदिर बाशिंग के प्रधानाचार्य छविंद्र पाल ने कहा कि नशे के खिलाफ जंग लड़ने की जिम्मेवारी सिर्फ पुलिस की ही नहीं है। यह हम सबकी नैतिक जिम्मेवारी है। आज के समय में भी समाज में कुरीतियां मौजूद हैं जो हमारे समाज के लिए बेहद घातक हैं। एक बार नशे के चंगुल में फंस जाने के बाद युवा इससे बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि नशे से दूर रहें।