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स्कीर्ण जोत के लिए रवाना हुई श्रृंगाऋषि की छड़ी
Updated Sun, 13 May 2018 09:48 PM IST
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स्कीर्ण जोत के लिए रवाना
हुई शृंगा ऋषि की छड़ी
11 फुट ऊंचे धार्मिक स्थल में होगा देव परंपरा का निर्वहन
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। बंजार क्षेत्र के पांच कोठी के आराध्य देव शृंगा ऋषि अपने मूल स्थान स्कीर्ण जोत के लिए रवाना हो गए हैं। पूरे लाव लश्कर के साथ देवालय से निकली अधिष्ठाता की छड़ी जयकारों के साथ रवाना हुई और पूरा बंजार क्षेत्र देवमय हो उठा। देवता शृंगा ऋषि हर साल ज्येष्ठ संक्रांति की पूर्व संध्या पर स्कीर्ण जोत के लिए रवाना होते हैं। यहां एक साल देवता का रथ तो दूसरे साल देवता की छड़ी या चिन्ह जाता है।
रविवार दोपहर बाद देवता की छड़ी चैहणी स्थित अपने देवालय से देव परंपरा के तहत रवाना हुई। इस दौरान देव हारियानों के अलावा हजारों श्रद्धालु खुले आसमान तले देवता का गुणगान और जागरण करेंगे। अगले दिन सोमवार को ज्येष्ठ संक्रांति अवसर पर सुबह पूजा अर्चना के बाद देवता की छड़ी के समक्ष मुंडन संस्कार प्रक्रिया शुरू होगी। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धालु स्कीर्ण में शृंगा ऋषि की शरण में पुत्र प्राप्ति के लिए आते हैं। देवता के पुजारी मोहर सिंह शर्मा ने कहा कि देवता शृंगा ऋषि हर साल 11 हजार फुट ऊंचे धार्मिक स्थल स्कीर्ण जोत के लिए सालों पुरानी परंपरा के निर्वहन के लिए जाते हैं। इस बार भी देवता की छड़ी लाव लश्कर के साथ रवाना हुई। यहां से लौटने के बाद अगले दिन जिला स्तरीय बंजार मेला 15 मई से विधिवत रूप से शुरू होगा।
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हुई शृंगा ऋषि की छड़ी
11 फुट ऊंचे धार्मिक स्थल में होगा देव परंपरा का निर्वहन
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। बंजार क्षेत्र के पांच कोठी के आराध्य देव शृंगा ऋषि अपने मूल स्थान स्कीर्ण जोत के लिए रवाना हो गए हैं। पूरे लाव लश्कर के साथ देवालय से निकली अधिष्ठाता की छड़ी जयकारों के साथ रवाना हुई और पूरा बंजार क्षेत्र देवमय हो उठा। देवता शृंगा ऋषि हर साल ज्येष्ठ संक्रांति की पूर्व संध्या पर स्कीर्ण जोत के लिए रवाना होते हैं। यहां एक साल देवता का रथ तो दूसरे साल देवता की छड़ी या चिन्ह जाता है।
रविवार दोपहर बाद देवता की छड़ी चैहणी स्थित अपने देवालय से देव परंपरा के तहत रवाना हुई। इस दौरान देव हारियानों के अलावा हजारों श्रद्धालु खुले आसमान तले देवता का गुणगान और जागरण करेंगे। अगले दिन सोमवार को ज्येष्ठ संक्रांति अवसर पर सुबह पूजा अर्चना के बाद देवता की छड़ी के समक्ष मुंडन संस्कार प्रक्रिया शुरू होगी। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धालु स्कीर्ण में शृंगा ऋषि की शरण में पुत्र प्राप्ति के लिए आते हैं। देवता के पुजारी मोहर सिंह शर्मा ने कहा कि देवता शृंगा ऋषि हर साल 11 हजार फुट ऊंचे धार्मिक स्थल स्कीर्ण जोत के लिए सालों पुरानी परंपरा के निर्वहन के लिए जाते हैं। इस बार भी देवता की छड़ी लाव लश्कर के साथ रवाना हुई। यहां से लौटने के बाद अगले दिन जिला स्तरीय बंजार मेला 15 मई से विधिवत रूप से शुरू होगा।
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