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ब्यास नदी किनारे अतिसंवेदनशील जगहों पर लगेंगे सीसीटीवी
Updated Sat, 14 Apr 2018 10:12 PM IST
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ब्यास नदी किनारे अतिसंवेदनशील जगहों पर लगेंगे सीसीटीवी
पुलिस से ली जाएगी अतिसंवदेनशील जगहों की रिपोर्ट
हादसों से निपटने के लिए प्रशासन हुआ चौकस
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। आगामी पर्यटन सीजन को ध्यान में रखते हुए ब्यास नदी के किनारों पर अतिसंवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे। सीसीटीवी से पर्यटकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। पर्यटन सीजन के साथ ब्यास नदी के किनारों में सेल्फी लेने वालों की संख्या बढ़ जाती है। जिससे बहने का खतरा बढ़ जाता है। हादसों से निपटने के लिए जिला प्रशासन चौकस हो गया है।
मंडी जिला की सीमा लेकर मनाली तक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ब्यास नदी बहती है। बाहरी राज्यों से मनाली घूमने पहुंच रहे हजारों सैलानी नदी को देखकर आकर्षित हो जाते हैं। कई जगह सड़क के साथ नदी बेहद नजदीक है और यहां आसानी से उतरा भी जा सकता है। ऐसी जगहों पर ब्यास नदी किनारों में जागरूकता के लिए चेतावनी बोर्ड लगाने के बावजूद पर्यटक धड्डले से उतर जाते हैं। नदी किनारों में सेल्फी के दौर के बीच पर्यटक फिसलकर नदी में गिर जाते हैं। गर्मियों के दौरान नदी का बहाव तेज होने के कारण पर्यटक बह जाते हैं। ब्यास में लापता पर्यटकों को ढूंढने के लिए भी पुलिस को सर्च आपरेशन चलाना पड़ता है। कड़ी मशक्कत बाद बहे पर्यटकों के शव ब्यास से निकाले जाते हैं। सीसीटीवी के माध्यम से कंट्रोल रूम से पर्यटकों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। मनाही के बाजवूद नदी में उतरने वाले पर्यटकों को रोका जाएगा।
इनसेट
यह हैं अतिसंवेदनशील जगह
कुल्लू जिला में रामशिला, बबेली, रॉयसन, वशिष्ठ में ज्यातर सैलानी सड़क किनारे वाहन पार्क कर धड्डले से सैंकड़ों सैलानी नदी किनार उतर जाते हैं। इसी तरह तीर्थन घाटी में तीर्थन नदी में हादसे पेश आते हैं। अधिकत्तर बहने के मामलों सेल्फी लेती बार ही पेश आते हैं।
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बॉक्स
सात सालों में डूबने से हो चुकी है 103 की मौतें
जिला कुल्लू में सात सालों के भीतर बहने व डूबने से 103 लोगों की मौत हो गई है। सबसे अधिक हादसे जिला मुख्यालय के साथ बहने वाली ब्यास व पार्वती नदी में हुए है। 2014 में सबसे अधिक 24 लोगों की मौत हुई है। जबकि गत साल 2016 में 21 लोगों की डूबने से जान चली गई है। पुलिस विभाग से मिल आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 10 मामले सामने आए हैं। जबकि 2012 में नौ, 2013 में 13, 2014 में 24, 2015 में 19, 2016 में तथा मामले पेश आएं हैं। इसमें
रिवर राफ्ट के पलटने से भी कई पर्यटकों ने अपनी जान गवाई है।
बॉक्स
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सड़क के साथ बह रही ब्यास नदी के अंतिसंवेदनशील जगहों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना है। ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस संबंध में अतिसंवेदशील जगहों की रिपोर्ट पुलिस से मांगी जाएगी।
-युनूस, डीसी कुल्लू।
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पुलिस से ली जाएगी अतिसंवदेनशील जगहों की रिपोर्ट
हादसों से निपटने के लिए प्रशासन हुआ चौकस
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। आगामी पर्यटन सीजन को ध्यान में रखते हुए ब्यास नदी के किनारों पर अतिसंवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे। सीसीटीवी से पर्यटकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। पर्यटन सीजन के साथ ब्यास नदी के किनारों में सेल्फी लेने वालों की संख्या बढ़ जाती है। जिससे बहने का खतरा बढ़ जाता है। हादसों से निपटने के लिए जिला प्रशासन चौकस हो गया है।
मंडी जिला की सीमा लेकर मनाली तक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ब्यास नदी बहती है। बाहरी राज्यों से मनाली घूमने पहुंच रहे हजारों सैलानी नदी को देखकर आकर्षित हो जाते हैं। कई जगह सड़क के साथ नदी बेहद नजदीक है और यहां आसानी से उतरा भी जा सकता है। ऐसी जगहों पर ब्यास नदी किनारों में जागरूकता के लिए चेतावनी बोर्ड लगाने के बावजूद पर्यटक धड्डले से उतर जाते हैं। नदी किनारों में सेल्फी के दौर के बीच पर्यटक फिसलकर नदी में गिर जाते हैं। गर्मियों के दौरान नदी का बहाव तेज होने के कारण पर्यटक बह जाते हैं। ब्यास में लापता पर्यटकों को ढूंढने के लिए भी पुलिस को सर्च आपरेशन चलाना पड़ता है। कड़ी मशक्कत बाद बहे पर्यटकों के शव ब्यास से निकाले जाते हैं। सीसीटीवी के माध्यम से कंट्रोल रूम से पर्यटकों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। मनाही के बाजवूद नदी में उतरने वाले पर्यटकों को रोका जाएगा।
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यह हैं अतिसंवेदनशील जगह
कुल्लू जिला में रामशिला, बबेली, रॉयसन, वशिष्ठ में ज्यातर सैलानी सड़क किनारे वाहन पार्क कर धड्डले से सैंकड़ों सैलानी नदी किनार उतर जाते हैं। इसी तरह तीर्थन घाटी में तीर्थन नदी में हादसे पेश आते हैं। अधिकत्तर बहने के मामलों सेल्फी लेती बार ही पेश आते हैं।
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सात सालों में डूबने से हो चुकी है 103 की मौतें
जिला कुल्लू में सात सालों के भीतर बहने व डूबने से 103 लोगों की मौत हो गई है। सबसे अधिक हादसे जिला मुख्यालय के साथ बहने वाली ब्यास व पार्वती नदी में हुए है। 2014 में सबसे अधिक 24 लोगों की मौत हुई है। जबकि गत साल 2016 में 21 लोगों की डूबने से जान चली गई है। पुलिस विभाग से मिल आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 10 मामले सामने आए हैं। जबकि 2012 में नौ, 2013 में 13, 2014 में 24, 2015 में 19, 2016 में तथा मामले पेश आएं हैं। इसमें
रिवर राफ्ट के पलटने से भी कई पर्यटकों ने अपनी जान गवाई है।
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पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सड़क के साथ बह रही ब्यास नदी के अंतिसंवेदनशील जगहों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना है। ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस संबंध में अतिसंवेदशील जगहों की रिपोर्ट पुलिस से मांगी जाएगी।
-युनूस, डीसी कुल्लू।