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लहसुन पर बरपा झुलसा रोग का कहर
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:28 PM IST
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लहसुन की खेती झुलसा रोग की चपेट मेें
बारिश नहीं होने से सूखे की चपेट में आई फसल
मौसम में आए दिन बदलाव बना आफत : विभाग
खराहल (कुल्लू)। जिला में लहसुन फसल तैयार होने से पहले ही बीमारियों की चपेट आ गई। ऐसे में उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर होने के आसार बन गए हैं। इन दिनों लहसुन के लिए बारिश का होना अति आवश्यक है, लेकिन इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे हैं। ऐसे में फसल सूखे की चपेट में आने से सूखने लगी है। झुलसा रोग का कहर भी फसल पर बरपा है। जिसके चलते पौधे पीले पड़ने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि बारिश समय पर नहीं होती है तो असिंचित क्षेत्रों में फसल को काफी नुकसान हो जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है वहां पर सिंचाई करने की सलाह कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने दी है। जिला कुल्लू में वर्तमान में 1200 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन का उत्पादन हो रहा है। जिससे औसतन 14000 मीट्रिक टन उत्पादन हो जाता है लेकिन इस साल समय पर बारिश पर्याप्त न होने से पैदावार में गिरावट होने की संभावना जाहिर की जा रही है। कई इलाकों में तो सिंचाई के लिए पानी न होने से फसल सूखने लगी है। जिसके चलते उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
घाटी के लहसुन उत्पादक अमित कुमार, चमन, अनूप, कमल कुमार, सुरेश, सतीश ठाकुर और राम चंद आदि का कहना है कि लहसुन के पौधे बीमारी के कारण पीले होने लगे हैं। वही, थ्रिप्स कीट ने भी हमला बोल दिया है। इससे पहले सड़न रोग का कहर भी फसल पर बरपा था। ऐसे में लहसुन की फसल को नुकसान हो रहा है। वहीं इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक रतन भारद्वाज के अनुसार मौसम के बदलाव के कारण लहसुन पर बीमारियां पनप रही हैं। रोग से निजात के लिए स्कोर या डायथेन 45 और साईप्रमेथिन दवा का छिड़काव करें। किसान ब्लॉक स्तर के कृषि विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं।
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बारिश नहीं होने से सूखे की चपेट में आई फसल
मौसम में आए दिन बदलाव बना आफत : विभाग
खराहल (कुल्लू)। जिला में लहसुन फसल तैयार होने से पहले ही बीमारियों की चपेट आ गई। ऐसे में उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर होने के आसार बन गए हैं। इन दिनों लहसुन के लिए बारिश का होना अति आवश्यक है, लेकिन इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे हैं। ऐसे में फसल सूखे की चपेट में आने से सूखने लगी है। झुलसा रोग का कहर भी फसल पर बरपा है। जिसके चलते पौधे पीले पड़ने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि बारिश समय पर नहीं होती है तो असिंचित क्षेत्रों में फसल को काफी नुकसान हो जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है वहां पर सिंचाई करने की सलाह कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने दी है। जिला कुल्लू में वर्तमान में 1200 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन का उत्पादन हो रहा है। जिससे औसतन 14000 मीट्रिक टन उत्पादन हो जाता है लेकिन इस साल समय पर बारिश पर्याप्त न होने से पैदावार में गिरावट होने की संभावना जाहिर की जा रही है। कई इलाकों में तो सिंचाई के लिए पानी न होने से फसल सूखने लगी है। जिसके चलते उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
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घाटी के लहसुन उत्पादक अमित कुमार, चमन, अनूप, कमल कुमार, सुरेश, सतीश ठाकुर और राम चंद आदि का कहना है कि लहसुन के पौधे बीमारी के कारण पीले होने लगे हैं। वही, थ्रिप्स कीट ने भी हमला बोल दिया है। इससे पहले सड़न रोग का कहर भी फसल पर बरपा था। ऐसे में लहसुन की फसल को नुकसान हो रहा है। वहीं इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक रतन भारद्वाज के अनुसार मौसम के बदलाव के कारण लहसुन पर बीमारियां पनप रही हैं। रोग से निजात के लिए स्कोर या डायथेन 45 और साईप्रमेथिन दवा का छिड़काव करें। किसान ब्लॉक स्तर के कृषि विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं।
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