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केलांग: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 11 को करेंगे हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर भवन का शिलान्यास
Wed, 08 Jul 2026 07:01 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग (लाहौल-स्पीति)।
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग (लाहौल-स्पीति)।
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 08 Jul 2026 07:01 PM IST
सार
लाहौल-स्पीति जिला मुख्यालय केलांग के समीप गुस्कियार में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद का स्थायी हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर का निर्माण होगा।
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जेपी नड्डा
- फोटो : ANI
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिला मुख्यालय केलांग के समीप गुस्कियार में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद का स्थायी हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर का निर्माण होगा। 11 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इस रिसर्च केंद्र का आधारशिला रखेंगे। इस केंद्र में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य,जनजातीय समुदायों, जलवायु परिवर्तन और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान होगा। केलांग में आईसीएमआर की गतिविधियां साल 2015 में एक फील्ड स्टेशन के रूप में शुरू हुई थीं।
प्रारंभ में यह केंद्र नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ, जबलपुर के अधीन संचालित हुआ, जबकि वर्तमान में इसका संचालन रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, गोरखपुर कर रहा है। जिला मुख्यालय केलांग के समीप गुसकियार में स्थायी परिसर बनने से आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित की जाएगी। केंद्र ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, हृदय एवं श्वसन रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक और गैर-संचारी रोगों के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और पोषण पर अध्ययन होगा। पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि केंद्र में जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, महामारी निगरानी और टेलीमेडिसिन पर अनुसंधान होगा।
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प्रारंभ में यह केंद्र नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ, जबलपुर के अधीन संचालित हुआ, जबकि वर्तमान में इसका संचालन रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, गोरखपुर कर रहा है। जिला मुख्यालय केलांग के समीप गुसकियार में स्थायी परिसर बनने से आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित की जाएगी। केंद्र ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, हृदय एवं श्वसन रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक और गैर-संचारी रोगों के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और पोषण पर अध्ययन होगा। पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि केंद्र में जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, महामारी निगरानी और टेलीमेडिसिन पर अनुसंधान होगा।
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