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Kangra News: 42 हजार के चेक बाउंस मामले में दोषी को तीन माह की जेल
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अदालत ने लगाया 65 हजार रुपये जुर्माना, वादी को दिया जाएगा मुआवजा
भुगतान के लिए कानूनी नोटिस देने के बाद भी नहीं लौटाई थी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। 42 हजार रुपये के चेक अनादरण मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास और 65 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि वसूल होने पर वादी को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
शाहपुर तहसील के चुरथा निवासी जनम सिंह ने शिकायत में बताया कि आरोपी राजीव की मांग पर उसने 28 जून 2013 को 500 रुपये मासिक की आवर्ती जमा योजना शुरू की थी। पांच साल की अवधि पूरी होने पर 27 जून 2018 को उसे 42 हजार रुपये मिलने थे, लेकिन मांगने पर राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपी ने 18 सितंबर 2019 को 42 हजार रुपये का चेक दिया, जो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादरित हो गया।
कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग करने के बावजूद राशि नहीं मिली। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि संबंधित कंपनी को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। अदालत ने पाया कि चेक आरोपी ने व्यक्तिगत रूप से जारी किया था। आरोपी देनदारी से संबंधित वैधानिक अनुमान को खारिज करने के लिए भी कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने आरोपी को परवीक्षा का लाभ देने से इनकार करते हुए सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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भुगतान के लिए कानूनी नोटिस देने के बाद भी नहीं लौटाई थी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। 42 हजार रुपये के चेक अनादरण मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास और 65 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि वसूल होने पर वादी को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
शाहपुर तहसील के चुरथा निवासी जनम सिंह ने शिकायत में बताया कि आरोपी राजीव की मांग पर उसने 28 जून 2013 को 500 रुपये मासिक की आवर्ती जमा योजना शुरू की थी। पांच साल की अवधि पूरी होने पर 27 जून 2018 को उसे 42 हजार रुपये मिलने थे, लेकिन मांगने पर राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपी ने 18 सितंबर 2019 को 42 हजार रुपये का चेक दिया, जो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादरित हो गया।
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कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग करने के बावजूद राशि नहीं मिली। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि संबंधित कंपनी को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। अदालत ने पाया कि चेक आरोपी ने व्यक्तिगत रूप से जारी किया था। आरोपी देनदारी से संबंधित वैधानिक अनुमान को खारिज करने के लिए भी कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने आरोपी को परवीक्षा का लाभ देने से इनकार करते हुए सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।