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Kangra News: पुलिस को धमकाना पड़ा भारी, पिता-पुत्र को करना होगा आत्मसमर्पण
Tue, 25 Aug 2026 04:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:57 AM IST
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धर्मशाला। पुलिस कर्मियों से बदसलूकी, सरकारी काम में बाधा डालने और तबादला करवाने की धमकी देने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा सपना पांडे की अदालत ने पिता और पुत्र की अपील खारिज कर दी है।
अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों को सजा भुगतने के लिए संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
मामला 25 दिसंबर 2020 का है। ज्वालामुखी पुलिस की टीम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर मिली शिकायत की जांच के लिए गांव थाना पहुंची थी। यहां जमीन और रास्ते को लेकर दो पक्षों में विवाद था। पुलिस ने दोनों पक्षों को राजस्व विभाग से भूमि की निशानदेही करवाने और शांति बनाए रखने की सलाह दी।
इसी दौरान बलदेव सिंह और उसका बेटा सुरजीत सिंह मौके पर पहुंचे। अभियोजन के अनुसार दोनों ने पुलिस कर्मियों से बहस करते हुए पूछा कि वे उनकी जमीन में कैसे आए। दोनों ने पुलिस कर्मियों का तबादला करवाने की धमकी दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। करीब 30 से 35 मिनट तक दोनों ने पुलिस कर्मियों के सरकारी काम में बाधा डाली।
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निचली अदालत ने 13 मई 2026 को दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 186 और 189 के तहत दोषी ठहराया था। 16 मई को धारा 186 में तीन माह का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना, जबकि धारा 189 में एक साल का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दोषियों ने अपील में दलील दी कि पुलिस अपना काम पूरा कर चुकी थी और मौके पर कोई सरकारी कार्य लंबित नहीं था। उन्होंने पुलिस कर्मियों से पुरानी रंजिश और स्वतंत्र गवाहों की जांच नहीं किए जाने का तर्क भी दिया। अदालत ने सभी दलीलों पर विचार के बाद अपील खारिज कर निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।
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अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों को सजा भुगतने के लिए संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
मामला 25 दिसंबर 2020 का है। ज्वालामुखी पुलिस की टीम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर मिली शिकायत की जांच के लिए गांव थाना पहुंची थी। यहां जमीन और रास्ते को लेकर दो पक्षों में विवाद था। पुलिस ने दोनों पक्षों को राजस्व विभाग से भूमि की निशानदेही करवाने और शांति बनाए रखने की सलाह दी।
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इसी दौरान बलदेव सिंह और उसका बेटा सुरजीत सिंह मौके पर पहुंचे। अभियोजन के अनुसार दोनों ने पुलिस कर्मियों से बहस करते हुए पूछा कि वे उनकी जमीन में कैसे आए। दोनों ने पुलिस कर्मियों का तबादला करवाने की धमकी दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। करीब 30 से 35 मिनट तक दोनों ने पुलिस कर्मियों के सरकारी काम में बाधा डाली।
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निचली अदालत ने 13 मई 2026 को दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 186 और 189 के तहत दोषी ठहराया था। 16 मई को धारा 186 में तीन माह का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना, जबकि धारा 189 में एक साल का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दोषियों ने अपील में दलील दी कि पुलिस अपना काम पूरा कर चुकी थी और मौके पर कोई सरकारी कार्य लंबित नहीं था। उन्होंने पुलिस कर्मियों से पुरानी रंजिश और स्वतंत्र गवाहों की जांच नहीं किए जाने का तर्क भी दिया। अदालत ने सभी दलीलों पर विचार के बाद अपील खारिज कर निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।