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Kangra News: कर्ज के लौटाए पैसों से शुरू हुआ था ऐतिहासिक धुम्मूशाह मेला

Wed, 09 Apr 2025 01:00 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Apr 2025 01:00 AM IST
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The historic Dhummushah fair was started with the money returned from the loan
धर्मशाला के दाड़ी के धुम्मू शाह मेले में सजाई जा रही दुकानें। संवाद
धर्मशाला। कर्ज के लौटाए पैसों ने ऐतिहासिक धुम्मूशाह मेला दाड़ी की नींव रखी थी। धुम्मूशाह के गोद लिए परिवार ने अपने मालिक को श्रद्धांजलि देने स्वरूप मेले की शुरुआत की थी।
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मेले के शुरुआती दिनों में कुश्ती के विजेता पहलवानों को खाने-पीने की चीजें देकर सम्मानित किया जाता था। यह बात उस समय के धन्नासेठ धुम्मूशाह के गोद लिए परिवार के सदस्य विधि चंद ने कही। उन्होंने बताया कि धुम्मूशाह मेले की शुरुआत उनकी छह-सात पीढि़यों के पहले से हुई थी। विधि चंद बताते हैं कि उनके पूर्वजों के अनुसार ब्यास नदी के पार से उनका परिवार यहां आया था। इस दौरान एक परिवार धलूं, एक कनेड़ और एक परिवार दाड़ी में बस गया। दाड़ी में बसे परिवार ने उस समय के धन्नासेठ धुम्मूशाह के पास नौकरी शुरू की।
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धुम्मूशाह उस समय लोगों को ब्याज पर पैसे देते थे। उनकी सेवा भावना को देखते हुए धुम्मूशाह ने उनके परिवार को गोद ले लिया और अपनी जमीन-जायदाद भी उन्हें सौंप दी। धुम्मूशाह के देहांत के बाद एक दिन कहीं दूर से एक व्यक्ति आया और धुम्मूशाह से लिए कर्ज के पैसों को लौटाने की बात कही, जिस पर उनके पूर्वजों ने उस पैसे को लेने से इनकार कर दिया और गांव के अन्य लोगों से विचार-विमर्श किया। इसके बाद तर्क आया कि इन कर्ज के पैसों से क्यों न धुम्मूशाह की याद में कोई कार्य शुरू किया जाए।
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इसके चलते उस व्यक्ति के लौटाए कर्ज के पैसों से धुम्मूशाह मेले की शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि जब मेले की शुरुआत हुई थी तो यहां दंगल में हिस्सा लेने वाले पहलवानों को नकदी के बजाय खाने-पीने की वस्तुएं दी जाती थीं, ताकि उनकी जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने बताया कि प्रेमभावना से शुरू किए गए इस मेले ने आज व्यापारिक रूप ले लिया है। कभी कोड़ियों में बिकने वाले मेले के प्लाटों को आज हजारों रुपये में बेचा जा रहा है।

धर्मशाला के दाड़ी के धुम्मू शाह मेले में सजाई जा रही दुकानें। संवाद

धर्मशाला के दाड़ी के धुम्मू शाह मेले में सजाई जा रही दुकानें। संवाद

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