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Kangra News: शिवबाड़ी मंदिर में स्टार नाइट से पहले विवाद, जबरन चंदा वसूली का आरोप
Mon, 21 Apr 2025 10:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 21 Apr 2025 10:00 AM IST
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घनारी (ऊना)। गगरेट के ऐतिहासिक श्री महादेव द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी अंबोटा में प्रशासन द्वारा सालाना मेले के तहत 26-27 अप्रैल को पहली बार आयोजित की जा रही दो दिवसीय स्टार नाइट को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय लोगों और भाजपा का आरोप है कि कार्यक्रम के नाम पर प्रशासन ने जनसहयोग की आड़ में जबरन चंदा वसूला है।
आयोजन से पूर्व ही गगरेट क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ असंतोष फैल चुका है। आरोपों के अनुसार राजस्व कार्यालयों से लेकर बाजारों तक लोगों को पर्चियां थमा कर सहयोग राशि देने के लिए बाध्य किया गया। कई दुकानदारों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्य से दफ्तर गया तो उसे भी अनिवार्य रूप से चंदा देना पड़ा।
स्थानीय भाजपा नेता मंडल अध्यक्ष नितिन ठाकुर, महामंत्री अतुल शर्मा, मीडिया प्रभारी प्रिंस सुधेरा और नरेंद्र परमार ने सरकार से सवाल किया है कि इस आयोजन की कुल लागत क्या है, कितनी राशि अब तक वसूली जा चुकी है और किस प्रावधान या कानून के तहत यह राशि एकत्रित की जा रही है? उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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जन संगठनों ने भी उठाए सवाल
पूर्व प्रधान और भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह और जनकल्याण मंच के अध्यक्ष राम लुभाया ने कहा कि मंदिर की पवित्रता को देखते हुए इस प्रकार का मनोरंजनात्मक कार्यक्रम अनुचित है। उन्होंने कहा कि पर्ची काट को जबरन राशि वसूली गई है वह मुख्यमंत्री राहत कोष या ‘सुखाश्रय’ जैसी योजनाओं में लगाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह मंदिर ऐतिहासिक आस्था का प्रतीक है। इस परिसर में साधु-संतों की समाधियां हैं। यह स्थान साधना और आत्मिक शांति का केंद्र रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के स्थलों पर स्टार नाइट्स पर फिजूल खर्ची की बजाय कोई भक्ति जागरण होना चाहिए।
वहीं, दबी जुबान में कांग्रेस के अंदर भी असहमति के स्वर सुनाई दे रहे हैं। आम जनता और विपक्ष के साथ ही कांग्रेसी भी मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि भविष्य में धार्मिक स्थलों को राजनीतिक या प्रशासनिक मंच के रूप में प्रयोग न होगा।
प्रशासनिक स्तर पर उपमंडल अधिकारी गगरेट सौमिल गौतम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं, जबरन वसूली का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
राज्य आर्थिक संकट में, अफसरशाही फिजूलखर्ची : मनोज कपूर
गगरेट के पूर्व बीडीसी सदस्य मनोज कपूर ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक हालत दयनीय है। प्रशासनिक अफसरशाही का धार्मिक स्थलों पर नाच-गानों का आयोजन कर फिजूलीखर्ची करवाना अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी ठेकेदार कर्ज लेकर काम कर रहे हैं और सरकार की प्राथमिकताएं असंतुलित हैं।
मीडिया के माध्यम से जबरन वसूली का पता चला है। अगर जबरन चंदा वसूली जैसा कुछ हो रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और जांच का विषय है। आरोप साबित होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-जगत सिंह नेगी, राजस्व मंत्री
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आयोजन से पूर्व ही गगरेट क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ असंतोष फैल चुका है। आरोपों के अनुसार राजस्व कार्यालयों से लेकर बाजारों तक लोगों को पर्चियां थमा कर सहयोग राशि देने के लिए बाध्य किया गया। कई दुकानदारों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्य से दफ्तर गया तो उसे भी अनिवार्य रूप से चंदा देना पड़ा।
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स्थानीय भाजपा नेता मंडल अध्यक्ष नितिन ठाकुर, महामंत्री अतुल शर्मा, मीडिया प्रभारी प्रिंस सुधेरा और नरेंद्र परमार ने सरकार से सवाल किया है कि इस आयोजन की कुल लागत क्या है, कितनी राशि अब तक वसूली जा चुकी है और किस प्रावधान या कानून के तहत यह राशि एकत्रित की जा रही है? उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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जन संगठनों ने भी उठाए सवाल
पूर्व प्रधान और भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह और जनकल्याण मंच के अध्यक्ष राम लुभाया ने कहा कि मंदिर की पवित्रता को देखते हुए इस प्रकार का मनोरंजनात्मक कार्यक्रम अनुचित है। उन्होंने कहा कि पर्ची काट को जबरन राशि वसूली गई है वह मुख्यमंत्री राहत कोष या ‘सुखाश्रय’ जैसी योजनाओं में लगाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह मंदिर ऐतिहासिक आस्था का प्रतीक है। इस परिसर में साधु-संतों की समाधियां हैं। यह स्थान साधना और आत्मिक शांति का केंद्र रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के स्थलों पर स्टार नाइट्स पर फिजूल खर्ची की बजाय कोई भक्ति जागरण होना चाहिए।
वहीं, दबी जुबान में कांग्रेस के अंदर भी असहमति के स्वर सुनाई दे रहे हैं। आम जनता और विपक्ष के साथ ही कांग्रेसी भी मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि भविष्य में धार्मिक स्थलों को राजनीतिक या प्रशासनिक मंच के रूप में प्रयोग न होगा।
प्रशासनिक स्तर पर उपमंडल अधिकारी गगरेट सौमिल गौतम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं, जबरन वसूली का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
राज्य आर्थिक संकट में, अफसरशाही फिजूलखर्ची : मनोज कपूर
गगरेट के पूर्व बीडीसी सदस्य मनोज कपूर ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक हालत दयनीय है। प्रशासनिक अफसरशाही का धार्मिक स्थलों पर नाच-गानों का आयोजन कर फिजूलीखर्ची करवाना अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी ठेकेदार कर्ज लेकर काम कर रहे हैं और सरकार की प्राथमिकताएं असंतुलित हैं।
मीडिया के माध्यम से जबरन वसूली का पता चला है। अगर जबरन चंदा वसूली जैसा कुछ हो रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और जांच का विषय है। आरोप साबित होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-जगत सिंह नेगी, राजस्व मंत्री