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Kangra News: कांगड़ा में मंदिर, चाय बागान और पौंग डैम का होगा कायाकल्प, दौड़े चले आएंगे सैलानी
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धर्मशाला। कांगड़ा जिला के शक्तिपीठ माता ज्वालाजी में आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार माता श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा का सौंदर्यीकरण भी करवाएगी। प्रदेश सरकार ने सोमवार को प्रस्तुत बजट में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बातें कहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा प्रथम चरण माता श्री ज्वालाजी मंदिर के लिए 100 करोड़ रुपये और धर्मशाला के तपोवन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। दूसरे चरण में माता श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा को सम्मिलित किया जाएगा।
कांगड़ा जिले को टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में पौंग डैम के साथ निकटतम क्षेत्रों के विकास के लिए नगरोटा सूरियां, खब्बल और वेलनेस सेंटर देहरा की डीपीआर बनाकर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को भेज दी गई है। इससे यहां पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
चाय बगानों में स्थापित होंगे ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कांगड़ा चाय को जीआई टैग मिला है, जो कि प्रदेश के लिए एक गौरव का विषय है। यह प्रदेश की आर्थिकी में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस क्षेत्र में रोजगार की भी बहुत संभावनाएं हैं। सरकार वर्तमान कानून में संशोधन करके टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए चाय के बागानों को सिक्किम, असम और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करेगी और निवेशकों को बिना किसी समस्या के सभी अनुमतियां प्रदान करेगी। इससे न केवल टी-प्लांटेशन को बढ़ाया और बचाया जा सकेगा, बल्कि हिमाचल की चाय को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी।
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कांगड़ा जिले को टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में पौंग डैम के साथ निकटतम क्षेत्रों के विकास के लिए नगरोटा सूरियां, खब्बल और वेलनेस सेंटर देहरा की डीपीआर बनाकर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को भेज दी गई है। इससे यहां पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
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चाय बगानों में स्थापित होंगे ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कांगड़ा चाय को जीआई टैग मिला है, जो कि प्रदेश के लिए एक गौरव का विषय है। यह प्रदेश की आर्थिकी में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस क्षेत्र में रोजगार की भी बहुत संभावनाएं हैं। सरकार वर्तमान कानून में संशोधन करके टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए चाय के बागानों को सिक्किम, असम और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करेगी और निवेशकों को बिना किसी समस्या के सभी अनुमतियां प्रदान करेगी। इससे न केवल टी-प्लांटेशन को बढ़ाया और बचाया जा सकेगा, बल्कि हिमाचल की चाय को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी।
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