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शिक्षा बोर्ड के साल में दो बार परीक्षा लेने पर अध्यापक संघ ने किया एतराज
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नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की ओर से इस सत्र से दो बार परीक्षाएं करवाने के निर्णय पर एतराज जताते हुए हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने इसे एक तरफा करार दिया है। संघ ने इस निर्णय को आगामी शिक्षा सत्र से लागू करने की मांग की है।
संघ के जिला प्रधान राकेश गौतम और मीडिया प्रभारी विजय धीमान ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाले शैक्षणिक सत्र में होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताएं और परीक्षाओं का संचालन आदि गतिविधियों का कैलेंडर सत्र के शुरुआत में ही तैयार कर लिया जाता है। इसी आधार पर पाठ्यक्रम का बंटवारा किया जाता है।
उन्होंने बताया कि करीब आधा सत्र निकल गया और एक बार निर्धारित परीक्षाएं भी हो गई हैं। ऐसे में अब नई परीक्षा प्रणाली को लागू करने से बेहतर परिणाम नहीं आएंगे। उन्होंने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मांग की है कि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इस नई परीक्षा प्रणाली को मौजूदा सत्र के बजाय आगामी सत्र से लागू किया जाए। संघ ने शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए बताया कि इस प्रकार के निर्णय लेने से पहले शिक्षक संगठनों की राय जानने के लिए शिक्षा बोर्ड की ओर से समय- समय पर बैठकें बुलाई जाती थी, जबकि कुछ समय से ऐसा नहीं हो रहा है, जो कि गंभीरता से विचारणीय है। उन्होंने बोर्ड प्रशासन से आग्रह किया है कि भविष्य में कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले शिक्षक संगठनों से भी विचार विमर्श किया जाना चाहिए।
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संघ के जिला प्रधान राकेश गौतम और मीडिया प्रभारी विजय धीमान ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाले शैक्षणिक सत्र में होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताएं और परीक्षाओं का संचालन आदि गतिविधियों का कैलेंडर सत्र के शुरुआत में ही तैयार कर लिया जाता है। इसी आधार पर पाठ्यक्रम का बंटवारा किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि करीब आधा सत्र निकल गया और एक बार निर्धारित परीक्षाएं भी हो गई हैं। ऐसे में अब नई परीक्षा प्रणाली को लागू करने से बेहतर परिणाम नहीं आएंगे। उन्होंने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मांग की है कि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इस नई परीक्षा प्रणाली को मौजूदा सत्र के बजाय आगामी सत्र से लागू किया जाए। संघ ने शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए बताया कि इस प्रकार के निर्णय लेने से पहले शिक्षक संगठनों की राय जानने के लिए शिक्षा बोर्ड की ओर से समय- समय पर बैठकें बुलाई जाती थी, जबकि कुछ समय से ऐसा नहीं हो रहा है, जो कि गंभीरता से विचारणीय है। उन्होंने बोर्ड प्रशासन से आग्रह किया है कि भविष्य में कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले शिक्षक संगठनों से भी विचार विमर्श किया जाना चाहिए।
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