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सर्दियों में विशेष सावधानी बरतें गर्भवती महिला : डॉ. पंकज

Tue, 16 Dec 2025 04:44 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 16 Dec 2025 04:44 AM IST
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Pregnant women should take special precautions in winter: Dr. Pankaj
इस मौसम में गर्भ में शिशु की मृत्यु होने का रहता है खतरा
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कहा, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने से रक्त संचार होता है प्रभावित
मुनीश महाजन
जसूर (कांगड़ा)। हिमाचल जैसे पहाड़ी और ठंडे राज्यों में सर्दी का मौसम जहां आम जनजीवन को प्रभावित करता है, वहीं यह गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है।
सर्दियों के महीनों में इंट्रायूटेराइन फीटल डेथ (आईयूएफडी), यानी गर्भ में ही शिशु की मृत्यु की घटनाएं अन्य मौसमों की तुलना में अधिक होती हैं। कांगड़ा जैसे क्षेत्रों में जहां तापमान अत्यधिक गिर जाता है और ठंडी हवाएं लगातार चलती रहती हैं, वहां गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज हीर ने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण मां के शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। इससे प्लेसेंटा तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते, जो गर्भस्थ शिशु के लिए घातक साबित हो सकता है।
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इसके अलावा सर्दियों में रक्त के थक्के बनने, हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और संक्रमण के फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह अथवा पहले से जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं में यह खतरा और अधिक गंभीर हो सकता है।
डॉ. हीर ने कहा कि इससे बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को शरीर को पूरी तरह गर्म रखना चाहिए। घर में हीटर अथवा अलाव का उपयोग करते समय उचित वेंटिलेशन जरूरी है, जिससे ऑक्सीजन की कमी न हो। मोटे और गर्म कपड़े पहनना, सिर-पैरों को ढककर रखना और ठंडे पानी से न नहाना और संतुलित पोषण भी बेहद आवश्यक है।

आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा लें। गर्म सूप, दूध, ड्राई फ्रूट्स और मौसमी फल-सब्जियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती हैं। इसके साथ ही नियमित अल्ट्रासाउंड और चिकित्सकीय जांच कराना, दवाओं का समय पर सेवन करना, हल्का व्यायाम, योग, पर्याप्त आराम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाना मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जरूरी है।
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