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Kangra News: अब मेघालय के किसान भी सुगंधित खेती से होंगे मालामाल
Fri, 07 Nov 2025 07:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 07 Nov 2025 07:50 AM IST
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मेघालय में किसानों के साथ सीएसआईआर पालमपुर की टीम स्त्रोत सीएसआईआर
सीएसआईआर पालमपुर के सहयोग से राज्य में खेती को मिलेगा बढ़ावा
सुगंधित खेती की अधिक संभावना के लिए संस्थान की टीम ने किया दौरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) संस्थान पालमपुर के सहयोग से अब मेघालय में किसान भी मालामाल होंगे। मेघालय में अब जल्द ही सुगंधित फसलों की खेती शुरू होगी। मेघालय में सुगंधित फसलों के खेती की संभावनाएं तलाशने के लिए सीएसआईआर पालमपुर की टीम ने निदेशक डॉ. सुदेश कुमार के नेतृत्व में मेघालय का दौरा किया है।
टीम ने प्राकृतिक संसाधन संस्थान, मेघालय बेसिन विकास प्राधिकरण (एमबीडीए), उत्तर पूर्वी क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन (एनईआरसीओआरएमएस) के अधिकारियों और ब्रिक-आईबीएसडी, शिलांग, मेघालय के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की और उन्हें अभिसरण मोड के तहत मेघालय के किसानों के लिए उपयुक्त सीएसआईआर-आईएचबीटी प्रौद्योगिकियों से अवगत करवाया। इससे आने वाले दिनों में मेघालय में सुगंधित फसलों की खेती हो सके। डॉ. सुदेश कुमार यादव ने किसानों को सुगंधित पौधों के महत्व, इत्र, स्वाद और सुगंध उद्योग तथा दवा उद्योग में इनके उपयोग के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने सीएसआईआर-अरोमा मिशन के तहत पूरे भारत में सुगंधित फसलों के तहत रकबे को बढ़ाने और दूरदराज के गांवों के किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से आईएनआर, एमबीडीए के सहयोग से सीएसआईआर अरोमा मिशन चरण-3 के तहत मेघालय में दो आसवन इकाइयां पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
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सीएसआईआर-आईएचबीटी के मुख्य वैज्ञानिक एवं अरोमा मिशन के सह-नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि सुगंधित फसलों से सुगंधित तेल निकाला जाता है । इसका उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन, एयर फ्रेशनर और अन्य उत्पादों में, खाने-पीने की चीजों में स्वाद के लिए और घरेलू सफाई उत्पादों में सुगंध के लिए किया जाता है। मेघालय की जलवायु सुगंधित घास, पुदीना, जेरेनियम, पचौली और डैमस्क गुलाब आदि की खेती के लिए उपयुक्त है।
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सुगंधित खेती की अधिक संभावना के लिए संस्थान की टीम ने किया दौरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पालमपुर (कांगड़ा)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) संस्थान पालमपुर के सहयोग से अब मेघालय में किसान भी मालामाल होंगे। मेघालय में अब जल्द ही सुगंधित फसलों की खेती शुरू होगी। मेघालय में सुगंधित फसलों के खेती की संभावनाएं तलाशने के लिए सीएसआईआर पालमपुर की टीम ने निदेशक डॉ. सुदेश कुमार के नेतृत्व में मेघालय का दौरा किया है।
टीम ने प्राकृतिक संसाधन संस्थान, मेघालय बेसिन विकास प्राधिकरण (एमबीडीए), उत्तर पूर्वी क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन (एनईआरसीओआरएमएस) के अधिकारियों और ब्रिक-आईबीएसडी, शिलांग, मेघालय के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की और उन्हें अभिसरण मोड के तहत मेघालय के किसानों के लिए उपयुक्त सीएसआईआर-आईएचबीटी प्रौद्योगिकियों से अवगत करवाया। इससे आने वाले दिनों में मेघालय में सुगंधित फसलों की खेती हो सके। डॉ. सुदेश कुमार यादव ने किसानों को सुगंधित पौधों के महत्व, इत्र, स्वाद और सुगंध उद्योग तथा दवा उद्योग में इनके उपयोग के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने सीएसआईआर-अरोमा मिशन के तहत पूरे भारत में सुगंधित फसलों के तहत रकबे को बढ़ाने और दूरदराज के गांवों के किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से आईएनआर, एमबीडीए के सहयोग से सीएसआईआर अरोमा मिशन चरण-3 के तहत मेघालय में दो आसवन इकाइयां पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
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सीएसआईआर-आईएचबीटी के मुख्य वैज्ञानिक एवं अरोमा मिशन के सह-नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि सुगंधित फसलों से सुगंधित तेल निकाला जाता है । इसका उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन, एयर फ्रेशनर और अन्य उत्पादों में, खाने-पीने की चीजों में स्वाद के लिए और घरेलू सफाई उत्पादों में सुगंध के लिए किया जाता है। मेघालय की जलवायु सुगंधित घास, पुदीना, जेरेनियम, पचौली और डैमस्क गुलाब आदि की खेती के लिए उपयुक्त है।