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Kangra News: आदि शक्ति आग है, जल है, पवन है, प्रलय है, निर्माण है, धरा है...विजिटर बुक में लिखा अटल संदेश
Fri, 26 Dec 2025 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 26 Dec 2025 12:54 AM IST
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ज्वालामुखी(कांगड़ा)। हिमाचल के जिला कांगड़ा में स्थित विश्वविख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी से जुड़ी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की यादें उनके चाहने वालों ने संजोकर रखी हैं। वह पहली बार मई 1980 और फिर 1985 में ज्वालामुखी आए थे। 4 मई 1980 को हिमाचल प्रदेश भाजपा का गठन ज्वालामुखी के गीता भवन में वाजपेयी की उपस्थिति में ही हुआ था। यह बात ज्वालामुखी के अधिवक्ता अभिषेक पाधा ने बताई।
यह उनको इसलिए ज्ञात है क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद पाधा बीजेपी के प्रमुख कार्यकर्ता थे और सारा गठन उनके समक्ष हुआ था। उन्होंने बताया कि हिमाचल भाजपा के गठन की पिछली रात वाजपेयी ज्वालामुखी में डॉ. कुंडू के घर पर रुके थे। अगले दिन बैठक वाली जगह ज्वालामुखी के गीता भवन में ही खाने की व्यवस्था थी। भीड़ के हिसाब से कम खाना देखकर उन्होंने रसोई बनाने वाले को दाल में पानी डालने की बात कही, जिसे सुनकर सभी हैरान हो गए। इतना ही नहीं वाजपेयी ने यह कहकर सभी को चौंका दिया था कि वह सभी को भोजन खिलाने के बाद ही खाना लेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ज्वालामुखी के गीता भवन में भाजपा के गठन के बाद ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाया था। उन्होंने मंदिर की विजिटर बुक में लिखा-आदि शक्ति आग है, जल है, पवन है, प्रलय है, निर्माण है, धरा है... इसे नमस्कार है, शत-शत नमन है। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी मौजूद थे। ज्वालामुखी के डॉ. अमरनाथ शर्मा बताते हैं कि डॉ. कुंडू के घर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं के साथ परिचय किया था। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल को उन्होंने कहते सुना था कि व्यक्ति को अपने नाम की सार्थकता कभी नहीं भूलनी चाहिए। उनका अभिप्राय था कि व्यक्ति का जो नाम है, उसी के अनुरूप उसका व्यवहार और आचरण भी होना चाहिए।
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यह उनको इसलिए ज्ञात है क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद पाधा बीजेपी के प्रमुख कार्यकर्ता थे और सारा गठन उनके समक्ष हुआ था। उन्होंने बताया कि हिमाचल भाजपा के गठन की पिछली रात वाजपेयी ज्वालामुखी में डॉ. कुंडू के घर पर रुके थे। अगले दिन बैठक वाली जगह ज्वालामुखी के गीता भवन में ही खाने की व्यवस्था थी। भीड़ के हिसाब से कम खाना देखकर उन्होंने रसोई बनाने वाले को दाल में पानी डालने की बात कही, जिसे सुनकर सभी हैरान हो गए। इतना ही नहीं वाजपेयी ने यह कहकर सभी को चौंका दिया था कि वह सभी को भोजन खिलाने के बाद ही खाना लेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ज्वालामुखी के गीता भवन में भाजपा के गठन के बाद ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाया था। उन्होंने मंदिर की विजिटर बुक में लिखा-आदि शक्ति आग है, जल है, पवन है, प्रलय है, निर्माण है, धरा है... इसे नमस्कार है, शत-शत नमन है। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी मौजूद थे। ज्वालामुखी के डॉ. अमरनाथ शर्मा बताते हैं कि डॉ. कुंडू के घर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं के साथ परिचय किया था। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल को उन्होंने कहते सुना था कि व्यक्ति को अपने नाम की सार्थकता कभी नहीं भूलनी चाहिए। उनका अभिप्राय था कि व्यक्ति का जो नाम है, उसी के अनुरूप उसका व्यवहार और आचरण भी होना चाहिए।
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