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Kangra News: कांगड़ा में एंबुलेंस 60, विभाग के पास चालक महज 10
Fri, 26 Dec 2025 01:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 26 Dec 2025 01:47 AM IST
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धर्मशाला। प्रदेशभर में 108 और 102 एंबुलेंस के कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा हजारों लोगों को झेलना पड़ सकता है। कर्मचारियों की वीरवार शाम 8 बजे से शुरू होने वाली 48 घंटे की हड़ताल के दौरान 60 एंबुलेंस का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के मात्र 10 चालकों पर रहेगा। 48 घंटों तक प्रदेश के सबसे बड़े जिला में केवल 10 एंबुलेंस ही अपनी सेवाएं दे सकेंगी। ऐसे में किसी आपातकालीन स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है। इतने बड़े जिला कांगड़ा में केवल 10 एंबुलेंस पर्याप्त नहीं होंगी
जानकारी के अनुसार जिला कांगड़ा में आपातकालीन सेवा 108 और 102 एंबुलेंस के संचालक मैडसवान फाऊंडेशन के पास 60 एंबुलेंस हैं, जिसमें 108 एंबुलेंस की संख्या 35 और 102 एंबुलेंस की संख्या 25 है। जिला में स्वास्थ्य विभाग के पास केवल 10 ही अपने चालक हैं। जिला में विभाग के चालकों के 57 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 47 पद खाली चल रहे हैं। पड़ताल को ध्यान में रखते हुए विभाग से अपने चालकों की डयूटी तो लगा दी है, लेकिन 10 चालक पूरे जिला का जिम्मा नहीं संभाल सकते हैं।
अगर हड़ताल की अवधि के समय कोई आपदा या बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उस दौरान स्थिति को संभालना काफी मुश्किल हो सकता है। समय पर एंबुलेंस सेवा न मिल पाने से कई लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्र में मरीजों को झेलना पड़ सकता है। सरकार की ओर से लंबे समय से खाली पद न भरे जाने का खामियाजा लोगों को झेलना पड़ रहा है। इससे पहले भी एंबुलेंस कर्मचारियों की ओर से दो बार हड़ताल की जा चुकी है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई थी।
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कर्मचारियों की पड़ताल के चलते विभाग की ओर से अपने 10 चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। 10 एंबुलेंस जिले के प्रमुख अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगी। खाली पदों के बारे में सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है।
- डॉ. विवेक करोल, सीएमओ, कांगड़ा
मैडसवान फाऊंडेशन के पास जिला में 60 एंबुलेंस तैनात हैं, जिसमें 108 और 102 एंबुलेंस शामिल हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य विभाग के चालक अपनी सेवाएं देंगे, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
- ईशान राणा, जिला अधिकारी, मैडसवान फाऊंडेशन
15 सालों से एंबुलेंस कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन आज तक उन्हें पूरा नहीं किया गया है। तीसरी बार कर्मचारियों की ओर से हड़ताल करनी पड़ रही है। न तो सरकार और न कंपनी कर्मचारियों की मांगों को पूरा कर रही है।
- प्रशांत, जिलाध्यक्ष, 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें...
- कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन दिया जाए।
- 12 घंटे काम करने पर ओवरटाइम दिया जाए।
- नियमानुसार छुट्टियों का प्रावधान किया जाए।
- गाड़ियों की मरम्मत के दौरान सभी कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दिया जाए।
- उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट और श्रम विभाग के न्यूनतम वेतन के संदर्भ में आदेशों को तुरंत लागू किया जाए।
- ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन की त्रुटियों को दुरुस्त किया जाए।
- कुल वेतन में कर्मचारियों का मूल वेतन कम है, उसे दुरुस्त किया जाए।
- वेतन में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए।
- सभी श्रम कानूनों को लागू किया जाए।
- मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को निरस्त किया जाए।
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जानकारी के अनुसार जिला कांगड़ा में आपातकालीन सेवा 108 और 102 एंबुलेंस के संचालक मैडसवान फाऊंडेशन के पास 60 एंबुलेंस हैं, जिसमें 108 एंबुलेंस की संख्या 35 और 102 एंबुलेंस की संख्या 25 है। जिला में स्वास्थ्य विभाग के पास केवल 10 ही अपने चालक हैं। जिला में विभाग के चालकों के 57 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 47 पद खाली चल रहे हैं। पड़ताल को ध्यान में रखते हुए विभाग से अपने चालकों की डयूटी तो लगा दी है, लेकिन 10 चालक पूरे जिला का जिम्मा नहीं संभाल सकते हैं।
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अगर हड़ताल की अवधि के समय कोई आपदा या बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उस दौरान स्थिति को संभालना काफी मुश्किल हो सकता है। समय पर एंबुलेंस सेवा न मिल पाने से कई लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्र में मरीजों को झेलना पड़ सकता है। सरकार की ओर से लंबे समय से खाली पद न भरे जाने का खामियाजा लोगों को झेलना पड़ रहा है। इससे पहले भी एंबुलेंस कर्मचारियों की ओर से दो बार हड़ताल की जा चुकी है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई थी।
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कर्मचारियों की पड़ताल के चलते विभाग की ओर से अपने 10 चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। 10 एंबुलेंस जिले के प्रमुख अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगी। खाली पदों के बारे में सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है।
- डॉ. विवेक करोल, सीएमओ, कांगड़ा
मैडसवान फाऊंडेशन के पास जिला में 60 एंबुलेंस तैनात हैं, जिसमें 108 और 102 एंबुलेंस शामिल हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य विभाग के चालक अपनी सेवाएं देंगे, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
- ईशान राणा, जिला अधिकारी, मैडसवान फाऊंडेशन
15 सालों से एंबुलेंस कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन आज तक उन्हें पूरा नहीं किया गया है। तीसरी बार कर्मचारियों की ओर से हड़ताल करनी पड़ रही है। न तो सरकार और न कंपनी कर्मचारियों की मांगों को पूरा कर रही है।
- प्रशांत, जिलाध्यक्ष, 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें...
- कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन दिया जाए।
- 12 घंटे काम करने पर ओवरटाइम दिया जाए।
- नियमानुसार छुट्टियों का प्रावधान किया जाए।
- गाड़ियों की मरम्मत के दौरान सभी कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दिया जाए।
- उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट और श्रम विभाग के न्यूनतम वेतन के संदर्भ में आदेशों को तुरंत लागू किया जाए।
- ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन की त्रुटियों को दुरुस्त किया जाए।
- कुल वेतन में कर्मचारियों का मूल वेतन कम है, उसे दुरुस्त किया जाए।
- वेतन में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए।
- सभी श्रम कानूनों को लागू किया जाए।
- मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को निरस्त किया जाए।