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Kangra News: चेक बाउंस मामले में ज्वेलर दोषी करार, छह माह की साधारण जेल
Thu, 21 May 2026 05:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 21 May 2026 05:41 AM IST
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धर्मशाला। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा की अदालत ने शाहपुर निवासी एक ज्वेलर को दोषी करार देते हुए 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी को शिकायतकर्ता को 5 लाख रुपये का भुगतान करने के भी आदेश दिए हैं। यदि दोषी इस राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले के अनुसार तहसील शाहपुर निवासी ज्वेलर की क्षेत्र के ही एक व्यक्ति के साथ गहरी मित्रता थी। ज्वेलर ने अपनी निजी आवश्यकताओं का हवाला देते हुए जुलाई 2021 में अपने दोस्त से 2.50 लाख रुपये उधार लिए और तीन महीने के भीतर पूरी राशि लौटाने का वादा किया। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब उसने पैसे नहीं लौटाए, तो शिकायतकर्ता ने तगादा शुरू किया।
इस पर ज्वेलर ने नवंबर 2021 में शिकायतकर्ता को एक चेक जारी किया। जब शिकायतकर्ता ने इसे चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो बैंक ने इसे ड्रॉअर (चेक जारी करने वाले) के हस्ताक्षर अलग होने की टिप्पणी के साथ रिजेक्ट कर दिया। शिकायतकर्ता ने जनवरी 2022 में कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयानों और पुख्ता दस्तावेजों के जरिए अपना केस पूरी तरह प्रमाणित किया है। दूसरी ओर आरोपी ज्वेलर ने कोर्ट में केवल आरोपों का खंडन किया, लेकिन अपनी बेगुनाही का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत चेक का बाउंस होना और कानूनी नोटिस के बाद भी भुगतान न करना एक गंभीर अपराध है। आरोपी का यह सोचना गलत था कि हस्ताक्षर अलग होने से वह बच जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि हस्ताक्षर भिन्न होने के कारण चेक का रिजेक्ट होना भी इसी अधिनियम के दायरे में आता है।
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मामले के अनुसार तहसील शाहपुर निवासी ज्वेलर की क्षेत्र के ही एक व्यक्ति के साथ गहरी मित्रता थी। ज्वेलर ने अपनी निजी आवश्यकताओं का हवाला देते हुए जुलाई 2021 में अपने दोस्त से 2.50 लाख रुपये उधार लिए और तीन महीने के भीतर पूरी राशि लौटाने का वादा किया। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब उसने पैसे नहीं लौटाए, तो शिकायतकर्ता ने तगादा शुरू किया।
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इस पर ज्वेलर ने नवंबर 2021 में शिकायतकर्ता को एक चेक जारी किया। जब शिकायतकर्ता ने इसे चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो बैंक ने इसे ड्रॉअर (चेक जारी करने वाले) के हस्ताक्षर अलग होने की टिप्पणी के साथ रिजेक्ट कर दिया। शिकायतकर्ता ने जनवरी 2022 में कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयानों और पुख्ता दस्तावेजों के जरिए अपना केस पूरी तरह प्रमाणित किया है। दूसरी ओर आरोपी ज्वेलर ने कोर्ट में केवल आरोपों का खंडन किया, लेकिन अपनी बेगुनाही का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत चेक का बाउंस होना और कानूनी नोटिस के बाद भी भुगतान न करना एक गंभीर अपराध है। आरोपी का यह सोचना गलत था कि हस्ताक्षर अलग होने से वह बच जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि हस्ताक्षर भिन्न होने के कारण चेक का रिजेक्ट होना भी इसी अधिनियम के दायरे में आता है।