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Kangra News: मंदिर की जमीन पर किरायेदारी की एंट्री गलत, कब्जा लौटाने के आदेश
Sat, 19 Sep 2026 11:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:55 AM IST
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धर्मशाला। सिविल जज कोर्ट नंबर दो कांगड़ा प्रियांशी की अदालत ने सूरजकुंड मंदिर की जमीन से जुड़े मामले में मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किरायेदारी संबंधी प्रविष्टियों को गलत और अमान्य करार देते हुए मंदिर को जमीन का मालिक माना है।
साथ ही जमीन का कब्जा मंदिर को सौंपने और प्रतिवादियों को जमीन की प्रकृति बदलने, नया निर्माण करने या किसी तरह का नुकसान पहुंचाने से रोकने के आदेश दिए हैं। मामला उपमहाल गुप्त गंगा, मौजा उज्जैन की 177.56 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। इसमें विभिन्न खसरा नंबर शामिल हैं।
मंदिर की ओर से दायर वाद के अनुसार वर्ष 1968-69 की जमाबंदी में सूरजकुंड मंदिर को जमीन का मालिक दर्ज किया गया था। इसमें दो लोगों का कब्जा दर्ज था लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट था कि मोहिमीन की सहमति से उनसे कोई लगान नहीं लिया जाता था। मंदिर पक्ष ने इसे लाइसेंस के आधार पर दिया गया कब्जा बताया था।
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बाद में वर्ष 1976-77 के बंदोबस्त में एक महिला का नाम गैर-मौरूसी के रूप में दर्ज हो गया। इसके बाद की जमाबंदियों में 12 रुपये सालाना किराया भी दर्ज किया गया। मंदिर पक्ष ने इन प्रविष्टियों को चुनौती देते हुए कहा कि न तो किरायेदारी बनाने का कोई वैध आदेश था और न ही वास्तव में किराया लिया गया था।
अदालत ने पाया कि वर्ष 1968-69 के रिकॉर्ड में जमीन मंदिर की मालिकाना थी और कोई लगान नहीं लिया जाता था। बाद की प्रविष्टियों में किरायेदारी दर्ज होने के बावजूद उसे वैध रूप से स्थापित करने वाला कोई आदेश या प्रमाण पेश नहीं किया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लाइसेंस के आधार पर जमीन पर रहने वाला व्यक्ति स्वत: किरायेदार बनकर हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व एवं काश्तकारी सुधार कानून के तहत मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकता। मंदिर पक्ष ने वर्ष 2017 में कानूनी नोटिस देकर लाइसेंस समाप्त कर दिया था।
अदालत ने माना कि इसके बाद जमीन का कब्जा मंदिर को मिलना चाहिए। मुकदमे के दौरान प्रतिवादी की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस भी अदालत में पेश नहीं हुए और 3 जुलाई 2025 को उन्हें एकतरफा कर दिया गया। उनकी ओर से न तो मंदिर के गवाहों से जिरह की गई और न ही बचाव में कोई साक्ष्य पेश किया गया।
अदालत ने मंदिर के पक्ष में घोषणा, कब्जा, स्थायी निषेधाज्ञा और अनिवार्य निषेधाज्ञा की एकतरफा डिक्री पारित की। साथ ही जमीन पर किए गए अनधिकृत बदलाव या निर्माण को हटाने के संबंध में भी आदेश दिए हैं।
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साथ ही जमीन का कब्जा मंदिर को सौंपने और प्रतिवादियों को जमीन की प्रकृति बदलने, नया निर्माण करने या किसी तरह का नुकसान पहुंचाने से रोकने के आदेश दिए हैं। मामला उपमहाल गुप्त गंगा, मौजा उज्जैन की 177.56 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। इसमें विभिन्न खसरा नंबर शामिल हैं।
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मंदिर की ओर से दायर वाद के अनुसार वर्ष 1968-69 की जमाबंदी में सूरजकुंड मंदिर को जमीन का मालिक दर्ज किया गया था। इसमें दो लोगों का कब्जा दर्ज था लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट था कि मोहिमीन की सहमति से उनसे कोई लगान नहीं लिया जाता था। मंदिर पक्ष ने इसे लाइसेंस के आधार पर दिया गया कब्जा बताया था।
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बाद में वर्ष 1976-77 के बंदोबस्त में एक महिला का नाम गैर-मौरूसी के रूप में दर्ज हो गया। इसके बाद की जमाबंदियों में 12 रुपये सालाना किराया भी दर्ज किया गया। मंदिर पक्ष ने इन प्रविष्टियों को चुनौती देते हुए कहा कि न तो किरायेदारी बनाने का कोई वैध आदेश था और न ही वास्तव में किराया लिया गया था।
अदालत ने पाया कि वर्ष 1968-69 के रिकॉर्ड में जमीन मंदिर की मालिकाना थी और कोई लगान नहीं लिया जाता था। बाद की प्रविष्टियों में किरायेदारी दर्ज होने के बावजूद उसे वैध रूप से स्थापित करने वाला कोई आदेश या प्रमाण पेश नहीं किया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लाइसेंस के आधार पर जमीन पर रहने वाला व्यक्ति स्वत: किरायेदार बनकर हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व एवं काश्तकारी सुधार कानून के तहत मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकता। मंदिर पक्ष ने वर्ष 2017 में कानूनी नोटिस देकर लाइसेंस समाप्त कर दिया था।
अदालत ने माना कि इसके बाद जमीन का कब्जा मंदिर को मिलना चाहिए। मुकदमे के दौरान प्रतिवादी की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस भी अदालत में पेश नहीं हुए और 3 जुलाई 2025 को उन्हें एकतरफा कर दिया गया। उनकी ओर से न तो मंदिर के गवाहों से जिरह की गई और न ही बचाव में कोई साक्ष्य पेश किया गया।
अदालत ने मंदिर के पक्ष में घोषणा, कब्जा, स्थायी निषेधाज्ञा और अनिवार्य निषेधाज्ञा की एकतरफा डिक्री पारित की। साथ ही जमीन पर किए गए अनधिकृत बदलाव या निर्माण को हटाने के संबंध में भी आदेश दिए हैं।