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स्कूल में पहली से बारहवीं तक कक्षाएं चलाने की मंजूरी दे सरकार: जसवंत
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जिला कांगड़ा निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य प्रेस वार्ता के दौरान।
- फोटो : Kangra
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चामुंडा (कांगड़ा)। प्रदेश सरकार कोरोना की आड़ लेकर बच्चों के भविष्य किसी तरह का खिलवाड़ न करे। जिला कांगड़ा निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष जसवंत डढवाल ने यह बात प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूलों को जल्दी खोला जाए, क्योंकि स्कूल बंद करने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
छोटी कक्षाओं के बच्चे जो लगभग पिछले दो सालों से स्कूल ही नहीं गए, लगभग सब कुछ भूल चुके है। घरों में बैठकर ऑनलाइन शिक्षा ले रहे विद्यार्थी कितना सीख पाए हैं, इसका उदाहरण सबके सामने है। बच्चे लिखना तक भूल चुके हैं।
शहरी क्षेत्रों में जो अभिभावक सक्षम थे, उन्होंने अपने बच्चों को ट्यूटर मुहैया करवा दिए। गरीबों के बच्चे, जिनके पास न फोन था न ट्यूशन, उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। मोबाइल फोन का लगातार प्रयोग करने के कारण बच्चों के दिमाग और आंखों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सब कुछ खुला है तो विद्यालय खोलने से सरकार को परहेज क्यों है। बच्चे भी रोजाना बाहर जाते हैं, तो फिर उन्हें स्कूल में क्या खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं राजनीतिक, वैवाहिक, सामाजिक कार्यक्रम को खोल रखा है तो फिर तो ऐसे में सरकार को विद्यालय भी खोलने चाहिए। स्कूलों में सभी तरह का विकास होता है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में शामिल होकर बच्चा अपने जीवन में सब कुछ सीखता है। सभी स्कूल संचालक और अभिभावक सरकार की कोरोना के बचाव के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर स्कूल खोलने को तैयार हैं और सरकार जल्द ही पहली से बारहवीं तक स्कूल खोलने पर फैसला ले, ताकि बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कर मार्च में बच्चों की परीक्षाएं आयोजित की जा सकें। उन्होंने कहा कि नौवीं कक्षा से ऊपर के विद्यार्थियों का तो टीकाकरण भी हो चुका तो ऐसे में स्कूलों को बंद करने का औचित्य समझ से परे है। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष अंकुश सूद, जिला कांगड़ा के उपाध्यक्ष सुशवीन पठानिया और रमन अवस्थी, संजय भाटिया, हरबंस कौंडल, अंकुर कटोच, दीपक सूद, विजय गुलेरिया, संजीव, सुरेश ठाकुर, बंटी शर्मा, पूजा सूद, गीतांजलि, राज कुमार, कुलदीप, देस राज, मुनीष अवस्थी, अनुपम, अनिल राणा, राकेश सरोच, मोहिंदर, रवि कुमार आदि उपस्थित रहे।
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छोटी कक्षाओं के बच्चे जो लगभग पिछले दो सालों से स्कूल ही नहीं गए, लगभग सब कुछ भूल चुके है। घरों में बैठकर ऑनलाइन शिक्षा ले रहे विद्यार्थी कितना सीख पाए हैं, इसका उदाहरण सबके सामने है। बच्चे लिखना तक भूल चुके हैं।
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शहरी क्षेत्रों में जो अभिभावक सक्षम थे, उन्होंने अपने बच्चों को ट्यूटर मुहैया करवा दिए। गरीबों के बच्चे, जिनके पास न फोन था न ट्यूशन, उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। मोबाइल फोन का लगातार प्रयोग करने के कारण बच्चों के दिमाग और आंखों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सब कुछ खुला है तो विद्यालय खोलने से सरकार को परहेज क्यों है। बच्चे भी रोजाना बाहर जाते हैं, तो फिर उन्हें स्कूल में क्या खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं राजनीतिक, वैवाहिक, सामाजिक कार्यक्रम को खोल रखा है तो फिर तो ऐसे में सरकार को विद्यालय भी खोलने चाहिए। स्कूलों में सभी तरह का विकास होता है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में शामिल होकर बच्चा अपने जीवन में सब कुछ सीखता है। सभी स्कूल संचालक और अभिभावक सरकार की कोरोना के बचाव के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर स्कूल खोलने को तैयार हैं और सरकार जल्द ही पहली से बारहवीं तक स्कूल खोलने पर फैसला ले, ताकि बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कर मार्च में बच्चों की परीक्षाएं आयोजित की जा सकें। उन्होंने कहा कि नौवीं कक्षा से ऊपर के विद्यार्थियों का तो टीकाकरण भी हो चुका तो ऐसे में स्कूलों को बंद करने का औचित्य समझ से परे है। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष अंकुश सूद, जिला कांगड़ा के उपाध्यक्ष सुशवीन पठानिया और रमन अवस्थी, संजय भाटिया, हरबंस कौंडल, अंकुर कटोच, दीपक सूद, विजय गुलेरिया, संजीव, सुरेश ठाकुर, बंटी शर्मा, पूजा सूद, गीतांजलि, राज कुमार, कुलदीप, देस राज, मुनीष अवस्थी, अनुपम, अनिल राणा, राकेश सरोच, मोहिंदर, रवि कुमार आदि उपस्थित रहे।
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