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ऐसे जज्बे को सलाम.... एंबुलेंस से पहले पहुंच गए ग्रामीण
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:36 AM IST
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एंबुलेंस से पहले पहुंच गए ग्रामीण
बस को काटकर निकाले शव और घायल बच्चे
कंधे पर बच्चों को उठाकर सड़क तक पहुंचाया
कंडवाल/जसूर/राजा का तालाब। मलकवाल-ठेहड़ लिंक रोड पर चेली गांव में हुए दर्दनाक हादसे में हार, फंगोता, बाड़ा, ठेहड़ सहित आसपास के गांवों के लोगों ने गजब का साहस दिखाया। दोपहर करीब सवा तीन बजे हादसा होने के तुरंत बाद सैकड़ों ग्रामीण खाई में गिरी बस से बच्चों को निकालने के लिए जुट गए। स्थानीय ग्रामीणों ने खाई में गिरी बस को काटकर उसमें से बच्चों के शव निकाले। लोगों ने कंधे पर लाशें और घायल बच्चों को उठाकर खड़ी चढ़ाई चढ़कर सड़क तक पहुंचाया। यहां दर्जनों लोग अपनी निजी गाड़ियां लेकर खड़े थे। लोगों ने अपनी निजी गाड़ियों में घायल बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाया और फौरी इलाज शुरू हुआ। घटनास्थल पर बच्चों के परिजनों के पहुंचने से पहले ही ग्रामीण बच्चों को अस्पताल ले जाने लगे। अस्पताल के पास सिर्फ दो एंबुलेंस थीं। इसलिए, ग्रामीण स्वेच्छा से अपनी गाड़ियों में घायल बच्चों और लाशों को ले जा रहे थे। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की स्थानीय इकाई ने भी यहां पर मानवता की मिसाल पेश की।
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बस को काटकर निकाले शव और घायल बच्चे
कंधे पर बच्चों को उठाकर सड़क तक पहुंचाया
कंडवाल/जसूर/राजा का तालाब। मलकवाल-ठेहड़ लिंक रोड पर चेली गांव में हुए दर्दनाक हादसे में हार, फंगोता, बाड़ा, ठेहड़ सहित आसपास के गांवों के लोगों ने गजब का साहस दिखाया। दोपहर करीब सवा तीन बजे हादसा होने के तुरंत बाद सैकड़ों ग्रामीण खाई में गिरी बस से बच्चों को निकालने के लिए जुट गए। स्थानीय ग्रामीणों ने खाई में गिरी बस को काटकर उसमें से बच्चों के शव निकाले। लोगों ने कंधे पर लाशें और घायल बच्चों को उठाकर खड़ी चढ़ाई चढ़कर सड़क तक पहुंचाया। यहां दर्जनों लोग अपनी निजी गाड़ियां लेकर खड़े थे। लोगों ने अपनी निजी गाड़ियों में घायल बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाया और फौरी इलाज शुरू हुआ। घटनास्थल पर बच्चों के परिजनों के पहुंचने से पहले ही ग्रामीण बच्चों को अस्पताल ले जाने लगे। अस्पताल के पास सिर्फ दो एंबुलेंस थीं। इसलिए, ग्रामीण स्वेच्छा से अपनी गाड़ियों में घायल बच्चों और लाशों को ले जा रहे थे। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की स्थानीय इकाई ने भी यहां पर मानवता की मिसाल पेश की।