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कांगड़ा में दो बाल आश्रमों के पास नहीं स्थाई पंजीकरण
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:50 PM IST
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कांगड़ा में दो बाल आश्रमों का स्थायी पंजीकरण नहीं
हर छह माह बाद निरीक्षण कर दी जाती है संचालन की अनुमति
जिला में चार बाल आश्रमों का संचालन कर रहीं निजी संस्थाएं
प्रदेश सरकार सिर्फ एक बाल आश्रम का कर रही संचालन
विपिन चौधरी
धर्मशाला। बिहार के मुज्जफरपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया के बालिका आश्रमों की घटनाओं से हिमाचल सरकार भी हरकत में आ गई है। कांगड़ा जिला में वर्तमान में सात बाल आश्रम चल रहे हैं। जिसमें से दो बाल आश्रमों के पास स्थायी पंजीकरण नहीं हैं। प्रशासन हर छह महीने बाद इन बाल आश्रमों को अस्थायी पंजीकरण जारी करता है। इस कारण दोनों आश्रमों के संचालक काम चला रहे हैं। मुजफ्फरपुर और देवरिया की घटना के बाद प्रशासन कांगड़ा जिला के दो अस्थायी पंजीकरण वाले बाल आश्रमों को स्थायी पंजीकरण के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कांगड़ा जिला में चार बाल आश्रमों का संचालन निजी संस्थाएं करती हैं। उधर, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा के जिला परियोजना अधिकारी रणजीत सिंह ने कहा कि अस्थायी पंजीकरण वाले दो बाल आश्रम के संचालक संस्थाओं को स्थायी पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां पर चल रहे हैं बाल आश्रम
जिला कांगड़ा में गरली-परागपुर में एक सरकारी बालिका आश्रम है। इस आश्रम में 75 लड़कियों को रखने की व्यवस्था है। इसके अलावा दाड़ी में चल रहे दिव्यांग बाल आश्रम में 50, कच्छियारी में 25, फरेड़ में 30, दैहण में 25 और धर्मशाला स्थित सेल्टर होम में भी 25 किशोरों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन मौजूदा समय में इन बाल आश्रमों में इनकी संख्या कम ही है।
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हर छह माह बाद निरीक्षण कर दी जाती है संचालन की अनुमति
जिला में चार बाल आश्रमों का संचालन कर रहीं निजी संस्थाएं
प्रदेश सरकार सिर्फ एक बाल आश्रम का कर रही संचालन
विपिन चौधरी
धर्मशाला। बिहार के मुज्जफरपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया के बालिका आश्रमों की घटनाओं से हिमाचल सरकार भी हरकत में आ गई है। कांगड़ा जिला में वर्तमान में सात बाल आश्रम चल रहे हैं। जिसमें से दो बाल आश्रमों के पास स्थायी पंजीकरण नहीं हैं। प्रशासन हर छह महीने बाद इन बाल आश्रमों को अस्थायी पंजीकरण जारी करता है। इस कारण दोनों आश्रमों के संचालक काम चला रहे हैं। मुजफ्फरपुर और देवरिया की घटना के बाद प्रशासन कांगड़ा जिला के दो अस्थायी पंजीकरण वाले बाल आश्रमों को स्थायी पंजीकरण के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कांगड़ा जिला में चार बाल आश्रमों का संचालन निजी संस्थाएं करती हैं। उधर, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा के जिला परियोजना अधिकारी रणजीत सिंह ने कहा कि अस्थायी पंजीकरण वाले दो बाल आश्रम के संचालक संस्थाओं को स्थायी पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
यहां पर चल रहे हैं बाल आश्रम
जिला कांगड़ा में गरली-परागपुर में एक सरकारी बालिका आश्रम है। इस आश्रम में 75 लड़कियों को रखने की व्यवस्था है। इसके अलावा दाड़ी में चल रहे दिव्यांग बाल आश्रम में 50, कच्छियारी में 25, फरेड़ में 30, दैहण में 25 और धर्मशाला स्थित सेल्टर होम में भी 25 किशोरों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन मौजूदा समय में इन बाल आश्रमों में इनकी संख्या कम ही है।
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