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एमसी धर्मशाला को हथियाने की तैयारी में भाजपा

Wed, 07 Feb 2018 11:49 PM IST
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:49 PM IST
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एमसी धर्मशाला को हथियाने की तैयारी में भाजपा
सुनील चड्ढा
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धर्मशाला। आजादी के बाद धर्मशाला को हिमाचल का पहला नगर निगम, दूसरी राजधानी और स्मार्ट सिटी का तमगा दिलाने के बावजूद हार का कड़वा घूंट पीकर सियासी कोपभवन में बैठे पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा को भाजपा एक और झटका देने की तैयारी में है।
हिमाचल में भगवा रंग के सत्तासीन होने के बाद भाजपा नगर निगम धर्मशाला पर कांग्रेस के कब्जे को छुड़ाने के लिए रणनीति बनाने के लिए जुट गई है। धर्मशाला भाजपा की कोर टीम के सदस्य दूत बनकर कांग्रेस पार्षदों को भेदने के लिए सियासी रण में कूद गए हैं। मंत्री बनने के बाद अब किशन कपूर धर्मशाला नगर निगम पर राजनीतिक कब्जा कर लोकसभा चुनाव के नजरिये से दिल्ली में अपनी पहली सियासी उपलब्धि दर्ज करना चाह रहे हैं। इसलिए सरकार के गठन के बाद से ही सियासी चौसर पर पासे फेंकना शुरू कर दिए गए हैं। सियासी चौसर पर भाजपा पहला पासा डिप्टी मेयर पद के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाकर फेंकना चाह रही है। डिप्टी मेयर पद वर्तमान में कांग्रेस समर्थित नेता देवेंद्र जग्गी के पास है। कांग्रेस शासन में नगर निगम और स्मार्ट सिटी पर अनौपचारिक रूप से सुधीर शर्मा के बाद देवेंद्र जग्गी का ही ज्यादा दबदबा रहा। इसलिए अब सियासी पिच पर भाजपा सबसे पहले डिप्टी मेयर पद पर जग्गी की विकेट गिराना चाह रही है। हालांकि, जग्गी को चुनाव के दौरान 17 में से 14 वोट मिले थे, लेकिन उस दौरान सुधीर शर्मा की रंग बिरंगे पेन की सियासी डिप्लोमेसी ने सियासी समीकरण मुफीद बनाए थे। भगवा रंग की एंट्री के बाद अब सियासी समीकरणों को बदलने की लॉबिंग शुरू हो गई है।
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सितंबर 2015 में धर्मशाला को नगर निगम बनाने की अधिसूचना जारी होने के बाद मार्च 2016 में नगर निगम के चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं हुए थे। ऐसे में कांग्रेस को नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर की कुर्सी पर बिठाने वाले अमूमन पार्षद ही कांग्रेस के ही पक्के साथी नहीं हैं। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि सियासी लोभ की पगडंडी पर ऐसे पार्षद कहीं फिसल न जाएं।
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डिप्टी मेयर पद पर ऐसे हो सकता है खेल
अप्रैल 2016 में डिप्टी मेयर बने देवेंद्र जग्गी को 17 वार्डों में से 14 वोट मिले थे। भाजपा की ओर से डिप्टी मेयर पद के लिए ओंकार नैहरिया ने नामांकन भरा था। नैहरिया को दो वोट मिले थे। उनका अपना वोट खराब हो गया था, लेकिन जग्गी के पक्ष में समीकरण अंतिम मौके पर सटीक बैठे थे। पहले कांग्रेस के ही एक कद्दावर नेता ने ओंकार नैहरिया को समर्थन देने की चाल चली थी। इसकी भनक लगने पर सुधीर शर्मा ने चुनाव के दौरान सभी पार्षदों को अलग-अलग रंग के पेन देकर तथाकथित कांग्रेस नेता का खेल बिगाड़ दिया था। अब भाजपा की सरकार और धर्मशाला से किशन कपूर की जीत के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों को तोड़कर कर डिप्टी मेयर का पद हथियाने की तैयारी शुरू हो गई है। चूंकि, वर्तमान में नगर निगम में भाजपा के 17 में से 3 पार्षद हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इनमें से कांग्रेस के कुछ पार्षद खिसक सकते हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर अब भाजपा डिप्टी मेयर पद पर अपना कब्जा करना चाह रही है।


छह माह बाद मेयर पद हो सकता है ओपन
6 माह बाद नगर निगम धर्मशाला के मेयर पद पर रजनी व्यास का ढाई साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। रजनी व्यास आरक्षित एससी कोटे से सर्वसहमति से मेयर पद पर मनोनीत हुई थीं। सरकार ने पहली बार बने नगर निगम धर्मशाला के मेयर पद के लिए 10 साल का रोस्टर जारी किया था। इसमें पहले ढाई साल तक एससी, दूसरे ढाई साल एसटी, तीसरे ढाई साल जनरल और चौथे ढाई साल के लिए यह पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। पहले ढाई साल का कार्यकाल अब 6 माह बाद खत्म होने वाला है। अधिसूचना के मुताबिक आरक्षित वर्ग से मेयर बनने के लिए संबंधित समुदाय वर्ग का धर्मशाला की कुल जनसंख्या में न्यूनतम 15 फीसदी योगदान होना चाहिए। रजनी व्यास जब मेयर बनी थीं तो धर्मशाला में एससी समुदाय करीब 22 फीसदी था। वर्तमान में एसटी समुदाय की प्रतिशतता धर्मशाला में करीब 13.18 फीसदी है। इसके चलते एसटी समुदाय का मेयर पद पद दावा मुश्किल होने की संभावना होगी। ऐसे में 6 माह बाद मेयर पद ओपन वर्ग के लिए भी खुल सकता है।
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