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टांडा में अस्पताल कर्मियों के इलाज में ही कोताही

Sun, 21 Oct 2018 11:35 PM IST
Updated Sun, 21 Oct 2018 11:35 PM IST
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टांडा में अस्पताल कर्मियों के इलाज में ही कोताही
धर्मशाला। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के सबसे बड़े अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स के ही इलाज में चिकित्सकों ने कोताही बरती। इस कारण आग से झुलसी स्टाफ नर्स ने 10 दिन अस्पताल में उपचार करवाने के बाद दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि उपचाराधीन स्टाफ नर्स के परिजन नाजुक हालत को देखकर चिकित्सक को बुलाते रहे, लेकिन चिकित्सक ने अपने ही अस्पताल की उपचाराधीन स्टाफ नर्स को देखने की जहमत नहीं उठाई। वहीं टांडा में उपचाराधीन नर्स की हुई अनदेखी और मौत के बाद टीएमसी कर्मचारी महासंघ डॉक्टरों के खिलाफ मुखर हो गया है।
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महासंघ के प्रधान एसएस राणा ने बताया कि टीबी चिकित्सालय में तैनात स्टाफ नर्स रोजी ठाकुर करीब 10 दिन पहले क्वार्टर में काम करने के दौरान आग से झुलस गई थी और उसका उपचार टीएमसी की बर्न यूनिट में चल रहा था। उन्होंने बताया कि नर्स के पति राजेश चौहान ने आरोप लगाया कि उपचार के दौरान न तो कॉलेज और न ही अस्पताल प्रशासन से किसी अधिकारी ने उनका कुशलक्षेम पूछा। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि शनिवार को रोजी की हालत नाजुक हो गई थी। इस पर वह चिकित्सक को बुलाते रहे, लेकिन चिकित्सक जांच करने के लिए नहीं आया। वहीं इसके करीब दो घंटे बाद एक जूनियर चिकित्सक को भेजा गया। लेकिन उसने उन्हें रोजी की पल्स रेट तथा यूरिन टेस्ट की रिपोर्ट उन्हें देते रहने को कहा। शनिवार रात करीब आठ बजे उसकी पत्नी की मौत हो गई।
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स्टाफ नर्स के पति ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही के चलते ही उसकी पत्नी की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल में तैनात एक कर्मी की ही चिकित्सकों ने सुध नहीं ली, तो आम आदमी यहां पर कितना परेशान होता होगा, इसका अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है।
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कोट्स
मुझे इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। अगर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से स्टाफ नर्स की मौत हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री।


आगजनी की घटना में झुलसी स्टाफ नर्स की जानकारी मिलते ही मैंने अस्पताल प्रशासन के साथ उनका कुशलक्षेम पूछा था। वहीं अगर इलाज में कोई कोताही बरती गई है तो इसकी जांच की जाएगी। -डा. गुरदर्शन गुप्ता, एसएमएस, टीएमसी।
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