फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   किराए के भवनों में चल रहे 194 आंगनबाड़ी केंद्र

किराए के भवनों में चल रहे 194 आंगनबाड़ी केंद्र

Mon, 20 Nov 2017 11:47 PM IST
Updated Mon, 20 Nov 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
किराए के भवनों में चल रहे 194 आंगनबाड़ी केंद्र
रितेश महाजन
विज्ञापन

नूरपुर (कांगड़ा)। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंगनबाड़ी केंद्र खोलने के मूल मकसद से राज्य सरकार अभी कोसों दूर है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी ढांचे की कमी के चलते नौनिहालों को पौष्टिक आहार और बढ़िया आंगन मुहैया करवाने की कल्पना हकीकत में साकार नहीं हो पाई है।
आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो अकेले नूरपुर खंड में ही 194 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। नतीजतन सैकड़ों नौनिहालों को इन उधार के भवनों में बैठना पड़ रहा है। हैरानी की बात है कि ये भवन आंगनबाड़ी केंद्रों के मापदंडों के अनुसार उपर्युक्त नहीं हैं, बावजूद इसके रोजमर्रा की गतिविधियां चलाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। कई जगहों पर तमाम कायदे-कानूनों को ताक पर रख कर बच्चों को ऐसे भवनों में बिठाया जा रहा है, जहां नौनिहालों की सुरक्षा रामभरोसे है। वर्तमान में नूरपुर विकास खंड के तहत कुल 349 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ 13 आंगनबाड़ी केंद्र औंद, गेहीं लगोढ़, सुड़याल (लदोड़ी), कमनाला, कुलाहण और ठेहड़ (गुरचाल), हाथीधार, बासा समलोटियां, गलोड़, सोगट, मुगड़याल, बदूही, डन्नी के पास अपने भवन हैं। शेष 12 आंगनबाड़ी केंद्र पंचायत घरों, 16 प्राइमरी स्कूलों, 11 आंगनबाड़ी केंद्र जंजघरों, एक आंगनबाड़ी केंद्र स्वास्थ्य विभाग के भवन, 102 आंगनबाड़ी केंद्र महिला मंडल भवनों और 194 किराये के निजी भवनों में चलाए जा रहे हैं। भले ही सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाने और बेहतर खाद्य वस्तुएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, लेकिन उन्हें बैठने के लिए उपर्युक्त स्थान प्रदान करने में सरकार अभी तक नाकाम रही है। जहां तक आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की बात है तो इसके लिए सरकार लाखों रुपये का बजट उपलब्ध करवा रही है, लेकिन संबंधित विभाग के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या और जमीन का अभाव नौनिहालों के बैठने के लिए उपयुक्त और सुरक्षित भवनों का निर्माण टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। लिहाजा इसके लिए सरकारी स्तर पर बजट में बढ़ोतरी के अलावा जमीन जुटाने में जन सहभागिता के बिना आंगनबाड़ी केंद्र खोलने का मकसद पूरा नहीं हो सकता।
विज्ञापन

क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी
नूरपुर महिला एवं बाल विकास अधिकारी जगदीश राज ने बताया कि विभाग की ओर से भवन निर्माण के लिए हर साल बजट जारी होता है और इसी के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण किया जाता है। लेकिन नए भवनों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध न होना सबसे बड़ी दिक्कत है, अगर कोई विभाग को आंगनबाड़ी केंद्र भवन के लिए जमीन दान देता है तो विभाग की ओर से जारी होने वाली धनराशि और मनरेगा के तहत नए भवन का निर्माण हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed