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रेलवे ही नहीं जानता कौन हैं बाबा भलकू
सुरेश शांडिल्य/शिमला
Updated Wed, 27 Feb 2013 08:30 AM IST
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बाबा भलकू के किस्से केवल किवदंतियों में ही हैं। उत्तर रेलवे भी बाबा भलकू की असल कहानी को सही-सही नहीं जानता। शिमला में बाबा भलकू के नाम से एकमात्र संग्रहालय बना हुआ है। इसमें उनका स्पष्ट विवरण ही अंकित नहीं है।
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माना जाता है कि अगर चायल के पहाड़ी बुजुर्ग बाबा भलकू ने अपनी लाठी से नापकर सर्वेक्षण नहीं किया होता, तो कालका से बड़ोग के रास्ते रेलमार्ग शिमला तक शायद ही पहुंच पाता। पहाड़ी रेलमार्ग कालका-शिमला यूनेस्को की सूची में शुमार होने पर दुनिया भर में चर्चित है।
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शिमला में पुराने बस स्टैंड के पास रेलवे स्टेशन के मुहाने पर 7 जुलाई 2011 को बाबा भलकू रेल संग्रहालय का उद्घाटन उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक शैलेंद्र कुमार ने किया। इसमें उत्तर रेलवे की कई विरासती वस्तुएं हैं। इसका नामकरण बाबा भलकू रेल संग्रहालय है। पर इसमें भीतर केवल बाबा का एक चित्र और इसके नीचे 2 मार्च 1862 को तत्कालीन पहाड़ी राज्यों के उपायुक्त डब्ल्यूएम हे की टिप्पणी है।
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हे के हवाले से केवल इतना स्पष्ट है कि वह एक सरकारी कर्मचारी भलकू के योगदान को भुला नहीं सकते थे। यहां बड़ोग सुरंग का मॉडल है। इसे बनाने में भलकू की भूमिका कितनी रही, इसका कोई उल्लेख नहीं है।
प्रबंधक ने खुद को किसी टिप्पणी के लिए अधिकृत नहीं बताया। मंगलवार को रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने जिन विरासतों के संरक्षण की बात की है, उनमें से शिमला-कालका रेल मार्ग एक है।
बाबा की आध्यात्मिक दृष्टि के कई किस्से
कहते हैं कि जब अंग्रेज इंजीनियर बड़ोग को सुरंग का दूसरा मुहाना नहीं मिला, तो उसने खुदकुशी कर ली थी। रेलवे में श्रमिक बाबा भलकू ने ही अपनी लाठी से इस पहाड़ी के नीचे प्रस्तावित सुरंग का दूसरा मुहाना निकाला। इसकी लंबाई एक किलोमीटर 143 मीटर और 61 सेंटीमीटर है।
कोई कहता है कि उन्हें इसका सपना आया था। अपनी आध्यात्मिक दृष्टि से ही उन्होंने यह कर दिखाया। कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं होने से रेलवे इस पर खामोश है। कहते यह भी हैं कि मशोबरा से बेखलटी तक भलकू सड़क नाम इसलिए पड़ा कि बाबा यहां से आगे तक रेल विस्तार चाहते थे।
इस संग्रहालय में हथकरघा संचालित लीवर, हेयर अवपथन उपकरण, लाइन बदलने का लीवर, पीतल की टोपी सहित अग्निशमन यंत्र, कोयले का बक्सा, चिमटा, छड़, बेलचा, मशाल पॉट, हस्त संकेत दीपक, सबसे बड़ी बड़ोग सुरंग का मॉडल, गुमशुदा संपत्ति रजिस्टर सहित और भी कई पुरानी वस्तुएं हैं।
मगर संग्रहालय में जाने वालों के सवाल बाबा भलकू के बारे में ही होते हैं, पर इनके जवाब देने वाला यहां कोई नहीं। यह सोमवार को छोड़कर हररोज 9.30 से लेकर 16.30 (4.30) बजे तक खुला होता है।