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हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका: कहा-अनुकंपा पर मिली नौकरी में असीमित करुणा का लाभ संभव नहीं

Tue, 27 Oct 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 27 Oct 2026 05:15 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलने के साथ ही संबंधित परिवार का संकट काल समाप्त माना जाता है। ऐसे में कर्मचारी को सामान्य कर्मियों की तरह ही अपने कॅरिअर में आगे बढ़ना होगा, उसे किसी विशेष दर्जे या असीमित करुणा का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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hp High Court on benefit of jobs obtained on compassionate grounds
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलने के साथ ही संबंधित परिवार का संकट काल समाप्त माना जाता है। ऐसे में कर्मचारी को सामान्य कर्मियों की तरह ही अपने कॅरिअर में आगे बढ़ना होगा, उसे किसी विशेष दर्जे या असीमित करुणा का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति नियमित भर्ती का जरिया नहीं, बल्कि परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सीमित राहत मात्र है। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने यह व्यवस्था पुलिस विभाग में अनुबंध पर तैनात क्लर्क जनक दुलारी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दी। अदालत ने कहा कि एक बार बिना किसी विरोध के पद स्वीकार कर लेने के बाद कर्मचारी को अपनी मर्जी से पद की स्थिति या सेवा शर्तों को अनुबंध से नियमित में बदलवाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता।

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मामले के अनुसार याचिकाकर्ता जनक दुलारी के पति राम स्वरूप पुलिस विभाग में सेवा के दौरान लापता हो गए थे। इसके बाद उनका सेवाकाल समाप्त मान लिया गया था। परिवार को तात्कालिक वित्तीय संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को 23 जून 2007 को पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अनुकंपा आधार पर अनुबंध क्लर्क नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने 2013 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर विभाग के 2012 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उनकी नौकरी को नियुक्ति की तारीख (2007) से नियमित करने का दावा खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि विभाग में अन्य कई आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव न किया जाए। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

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