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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP Assembly Session Occupation of lakhs of people living on forest land for three generations is regularized

Himachal Question Hour: वन भूमि पर तीन पुश्तों से रह रहे लाखों लोगों के कब्जे होंगे नियमित, जानें विस्तार से

Fri, 21 Mar 2025 06:16 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 21 Mar 2025 06:16 PM IST
सार

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधायक आशीष बुटेल की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि वन भूमि पर तीन पुश्तों से रह रहे लाखों लोगों के कब्जे नियमित होंगे। 

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HP Assembly Session Occupation of lakhs of people living on forest land for three generations is regularized
हिमाचल प्रदेश विधानसभा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

वन भूमि पर तीन पुश्तों से रह रहे लाखों लोगों के कब्जे नियमित होंगे। बीते तीन सालों में एफआरए 3 (1) के तहत 637 मामले और सेक्शन 3 (2) के तहत 2690 मामले स्वीकृत किए गए हैं। वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत लोगों को 50 बीघा तक मालिकाना हक मिलेगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने यह जानकारी विधायक आशीष बुटेल की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।

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मंत्री ने कहा कि दावेदार का कब्जा इस भूमि पर 13 दिसंबर 2005 से पहले तीन पुश्तों तक होना चाहिए। लाहौल स्पीति की विधायक अनुराधा ने भी अनुपुरक प्रश्न में पूछा कि वन विभाग के अधिकारी उन्हें इस मामले से संबंधित गलत जानकारी दे रहे हैं। इस पर मंत्री ने विधायक को आश्वस्त किया कि ऐसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

राजस्व मंत्री ने कहा कि 2008 से लेकर 2012 तक भाजपा सरकार केंद्र से वन अधिकार अधिनियम के स्पष्टीकरण का इंतजार करती रही। 2012 से 2017 के बीच कांग्रेस सरकार ने पंचायत स्तर पर एफआरए कमेटियां गठित कीं। 2017 से 2022 तक भाजपा सरकार में कोई काम नहीं हुआ। हमने आंदोलन चलाया। इसके बाद किन्नौर में कुछ केस निपटाए गए। इस सरकार में अब तक 4863 मामले निपटा दिए गए हैं। सामुदायिक वन अधिकार मामले में चंबा में अब तक सबसे अधिक 22,730 हेक्टेयर वन भूमि समुदाय के नाम हुई है।

ग्राम सभा में 50 फीसदी लोग यदि प्रार्थी के दावे का अनुमोदन करते हैं तो मालिकाना हक मिलना निश्चित हो जाएगा। ग्राम सभा सभी अनुमोदित मामले सत्यापन के लिए उपमंडल स्तरीय समिति को भेजेगी। उपमंडल स्तरीय समिति सभी मामलों के सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति दावों का निपटारा और दस्तावेजीकरण कर स्वीकृति देगी। इसके बाद दावेदार को भूमि का पट्टा देकर मालिकाना हक दिया जाएगा।
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जिला शिमला में सबसे ज्यादा 673 प्रस्ताव
नेगी कहा कि एसएलसी (स्टेट लेवल कमेटी) से स्वीकृत होकर जिला कुल्लू के 299, चंबा में 402, लाहौल स्पीति 54, सिरमौर 189, किन्नौर 209, मंडी 351, हमीरपुर 79, ऊना 10, शिमला 673, बिलासपुर 58, कांगड़ा 303 और सोलन के 63 प्रस्ताव स्वीकृति के बाद डीएलसी ने स्वीकृत किए हैं।
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जिला शिमला में सबसे ज्यादा 673 प्रस्ताव
नेगी कहा कि एसएलसी (स्टेट लेवल कमेटी) से स्वीकृत होकर जिला कुल्लू के 299, चंबा में 402, लाहौल स्पीति 54, सिरमौर 189, किन्नौर 209, मंडी 351, हमीरपुर 79, ऊना 10, शिमला 673, बिलासपुर 58, कांगड़ा 303 और सोलन के 63 प्रस्ताव स्वीकृति के बाद डीएलसी ने स्वीकृत किए हैं।

तीन वर्षों में एफआरएए के तहत दावों का जिलाबार ब्योरा
 
जिला   राज्य स्तरीय कमेटी से स्वीकृत प्रस्ताव
कुल्लू 193
चंबा 87
लाहौल स्पीति 121
किन्नौर  431
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