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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Vigilance Probe Ordered into JDA Projects Linked to RERA; Government Seeks Report Within 15 Days

Himachal: रेरा से जुड़े जेडीए प्रोजेक्ट्स की विजिलेंस जांच के आदेश, सरकार ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

Thu, 14 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 14 May 2026 05:00 AM IST
सार

प्रदेश सरकार ने रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) से मंजूर संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) परियोजनाओं की विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। 

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Himachal:  Vigilance Probe Ordered into JDA Projects Linked to RERA; Government Seeks Report Within 15 Days
हिमाचल प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण । - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) से मंजूर संयुक्त विकास समझौता (जेडीए) परियोजनाओं की विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। सरकार को आशंका है कि कुछ मामलों में हिमाचली कृषकों और गैर-कृषकों के बीच हुए भूमि समझौतों में अनियमितताएं हुई हैं तथा हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 का उल्लंघन भी हो सकता है। इस संबंध में आवास विभाग का जिम्मा संभाल रहे मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि विभाग ने पहले हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी से कई बार जानकारी और दस्तावेज मांगे, लेकिन बार-बार अनुरोध और रिमाइंडर भेजने के बावजूद आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए।

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सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो को निर्देश दिए हैं कि वह रेरा से संबंधित सभी जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज तुरंत हासिल करे। विशेष रूप से तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है, जिनमें रेरा में पंजीकृत जेडीए परियोजनाओं का विवरण, गैर-कृषकों को शामिल करने वाले जेडीए और रेरा की मंजूरी से रद्द किए गए जेडीए शामिल हैं। सरकार ने विजिलेंस से यह भी जांच करने को कहा है कि कहीं इन परियोजनाओं में धारा 118 के प्रावधानों की अवहेलना तो नहीं हुई। इसके अलावा यह भी परखा जाएगा कि रेरा ने रेरा एक्ट की धारा 5 के तहत प्रमोटरों की वित्तीय क्षमता और राजस्व रिकॉर्ड की जांच संबंधी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई या नहीं। पत्र में विजिलेंस ब्यूरो को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आगे कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

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