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Himachal Pradesh: समोसे के बाद मुर्गा परोसने पर सियासी बवाल, जानें क्या बोले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू

Sun, 15 Dec 2024 10:38 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/चौपाल/रोहडू/इंदौरा।
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/चौपाल/रोहडू/इंदौरा। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 15 Dec 2024 10:38 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में समोसे के बाद अब जंगली मुर्गे को लेकर विवाद छिड़ गया है। भाजपा का आरोप है कि कुपवी के टिक्कर में हुए कार्यक्रम में परोसा मुर्गा जंगली है और इसका शिकार कानून प्रतिबंधित है। पढ़ें पूरी खबर...

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कुपवी के टिक्कर में भोजन करते हुए सीएम सुक्खू व अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल में समोसे के बाद मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद रात्रि भोज में मुर्गा परोसने पर सियासत गरमा गई है। कुपवी में ग्रामीणों ने मुर्गा क्या परोसा, भाजपा ने इसे मुद्दा बना दिया। अब ये मुर्गा जंगली है या देसी यह जांच का विषय है। भाजपा का आरोप है कि कुपवी के टिक्कर में हुए कार्यक्रम में परोसा मुर्गा जंगली है और इसका शिकार कानून प्रतिबंधित है। भाजपा ने इसके लिए लिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और कथित मेन्यू का भी हवाला दिया है।

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हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह तेल युक्त व्यंजनों और नॉन वेज दोनों से ही स्वास्थ्य कारणों से परहेज करते हैं।  टिक्कर में जंगली नहीं, देसी मुर्गा परोसा था, जो इस क्षेत्र की पहाड़ी संस्कृति का हिस्सा है। जयराम ठाकुर को कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है। शुक्रवार रात को कुपवी के टिक्कर गांव में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अतिथियों के लिए रात्रि भोज रखा। इस रात्रि भोज के दौरान सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अन्य लोगों के बीच बातचीत का एक कथित वीडियो और मेन्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसी को आधार बनाकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित कई अन्य नेताओं ने इसे  मुद्दा बना लिया है। हालांकि, इस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने इससे इससे गांववासियों को बदनाम करने का रास्ता चुना गया है। विपक्ष के नेताओं के पास अब कोई मुद्दा नहीं है। सुक्खू ने कहा कि गांव वाले अपने लोकल हैं। हम खाते नहीं, फिर भी मुझे दे रहे थे। पहाड़ के जीवन में नॉन वेज भोजन है। इससे ग्रामीणों की छवि खराब हो रही है।

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मुर्गा खाने नहीं समस्याएं सुनने गए थे : सुक्खू
मुख्यमंत्री ने रात्रिभोज पर जंगली मुर्गा के सवाल पर पत्रकारों से कहा कि यह गलत बात है, क्योंकि जो चीज हुई नहीं उस पर क्या बात करें। वो मुर्गा जंगली नहीं था, वहां पर जनजातीय परंपरा है। वहां पर लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या आप मुर्गा खाते हैं तो मैंने इंकार किया। इस पर उन्होंने कहा कि यह देशी नहीं और बाजार से नहीं खरीदा है बल्कि अपना बनाया हुआ है। सुक्खू ने कहा कि वहां अपना का मतलब गांव का भी होता है। उन्होंने कहा कि हम मुर्गा खाने नहीं बल्कि समस्याएं सुनने गए थे। वहीं कुपवी में वापसी के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा मेरी छींक की भी खबर रख रही है। कभी टॉयलेट टैक्स तो कभी समोसा को लेकर बवाल कर रही है।

वन्य प्राणी विभाग को शिकायत, हो कार्रवाई
धर्मशाला में क्रांति संस्था के अध्यक्ष धीरज महाजन ने कहा कि तथ्यों की जांच होनी चाहिए। इसके लिए वन्य प्राणी विभाग उत्तरी क्षेत्र के माध्यम से शिकायत भेजी है। उधर, मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी विभाग उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला सरोज भाई पटेल ने कहा कि वह शनिवार को फील्ड में थे और शिकायत के बारे उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

रात को जंगली, सुबह देसी बता दिया : जयराम
पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री किस दर्जे का झूठ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि यह आज प्रदेश के लोगों ने फिर देख लिया। रात में जिसे जंगली मुर्गा बोलकर मुख्यमंत्री अपने सहयोगी और मंत्रियों को चटखारे ले लेकर खिला रहे थे, सुबह वही जंगली मुर्गा देसी मुर्गा बन गया। मुख्यमंत्री जो प्रदेश की संवैधानिक पर पर बैठता है और प्रदेश का संरक्षक होता है, उसकी ओर से इस तरह का बर्ताव करना और भी शर्मनाक है। कुपवी में शुक्रवार की रात में जो हुआ, उसे लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से पूरी दुनिया ने देखा। ठाकुर ने कहा कि खाना देने के दौरान मुख्यमंत्री को बताया जा रहा है कि जंगली मुर्गा है तो वह कहते हैं कि जंगली मुर्गा कहीं बनाया जाता है। उसके बाद वह पूछ–पूछकर अपने मंत्रियों और सहयोगियों को सर्व करने के लिए कहते हैं। अगले दिन जब यह मुद्दा बनता है और लोगों को पता चलता है की सरकारी संरक्षण में संरक्षित जंगली मुर्गा  सीएम के कार्यक्रम में परोसा गया है तो मुख्यमंत्री गैर जिम्मेदाराना बातें करते हैं। 
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