{"_id":"68712fa60983c093300588bd","slug":"himachal-illegally-allotted-forest-land-will-have-to-be-returned-sit-formed-to-investigate-2025-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Himachal News: अवैध रूप से आवंटित वन भूमि करनी होगी वापस, जांच को एसआईटी गठित; कार्रवाई की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Himachal News: अवैध रूप से आवंटित वन भूमि करनी होगी वापस, जांच को एसआईटी गठित; कार्रवाई की तैयारी
Sat, 12 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 12 Jul 2025 05:00 AM IST
सार
हिमाचल सरकार ने अवैध रूप से आवंटित वन भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए वन विभाग की ओर से शुक्रवार को इस बाबत राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने अवैध रूप से आवंटित वन भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने कोर्ट के आदेश पर जिलेवार एसआईटी का गठन कर दिया है। एसआईटी राजस्व विभाग की ओर से निजी व्यक्तियों या संस्थाओं को वन भूमि के अवैध या अनधिकृत आवंटन की जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए वन विभाग की ओर से शुक्रवार को इस बाबत राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई।
विज्ञापन
टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ (रिट याचिका संख्या 202/1995) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 15 मई 2025 को इस बाबत आदेश दिए थे। कोर्ट ने सभी राज्यों को ऐसे भूमि दुरुपयोग के मामलों की जांच करने और वन भूमि को दोबारा प्राप्त करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि प्रत्येक विशेष जांच दल की अध्यक्षता संबंधित जिले के उपायुक्त करेंगे। जिला राजस्व अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे, जबकि डीएफओ सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।
विज्ञापन
एसआईटी को ऐसे मामलों की पहचान और जांच करने को कहा गया है, जहां राजस्व विभाग के नियंत्रण वाली वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग के लिए प्रयोग किया गया है। ऐसी भूमि पर कब्जा कर उसे वन विभाग को वापस हस्तांतरित करना होगा। जहां भूमि का पुन: दावा व्यापक जनहित में न हो, वहां वन विकास के लिए भूमि की लागत का उपयोग करने के लिए कब्जाधारक से वसूली की सिफारिश करनी होगी।
विज्ञापन