HP High Court : खस्ताहाल परवाणू-शिमला हाईवे पर हिमाचल हाईकोर्ट की एनएचएआई को फटकार, क्षेत्रीय अधिकारी तलब
Himachal Pradesh High Court : हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि एनएचएआई अधिकारी प्रीमियम हाईवे की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे आम जनता और राज्य की अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से तलब होने के निर्देश दिए हैं।
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हिमाचल हाईकोर्ट ने खस्ताहाल राष्ट्रीय राजमार्ग शिमला-सोलन-परवाणू को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्यप्रणाली पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि एनएचएआई अधिकारी प्रीमियम हाईवे की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे आम जनता और राज्य की अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले में क्षेत्रीय अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से तलब होने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अधिकारी से एक व्यापक कार्य योजना पेश करने को कहा है, जिसमें अदालत को बताया जाए कि राज्य में कम से कम राष्ट्रीय मार्गों का रखरखाव कैसे किया जाएगा। अदालत ने पिछले आदेशों के जवाब में एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद कुमार की ओर से दायर हलफनामे पर असंतुष्टि जाहिर की है। हलफनामे में सही तथ्य नहीं दर्शाए गए हैं। दावा किया था कि स्टोन क्रशर हाईवे पर केवल 20 मीटर क्षेत्र में है, लेकिन कोर्ट ने मौके पर पाया कि यह क्षेत्र 200 मीटर से कम नहीं है, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो रही है।
अदालत ने प्राधिकरण को चेतावनी दी है कि अगर हाईवे का रखरखाव दुरुस्त नहीं किया जाता है तो केरल हाईकोर्ट के एक आदेश को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए फैसलों की तरह सनवारा में टोल बंद करने का आदेश दिया जा सकता है। अदालत ने याचिका दायर होने की तारीख वर्ष 2017 से अब तक एकत्रित टोल टैक्स का विवरण भी पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई 18 सितंबर को होगी। कोर्ट ने सेब सीजन का जिक्र करते हुए कहा कि रोज ट्रैफिक जाम से बागवानों को नुकसान हो रहा है और राज्य के लिए भी आर्थिक रूप से हानिकारक है। कोर्ट को बताया गया कि जुलाई-अगस्त में चक्की मोड़ पर सड़क तीन से अधिक बार बंद हुई। इससे पांच किलोमीटर तक लंबा जाम लगने से न केवल आम जनता को असुविधा हुई, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। अदालत ने कहा कि एनएचएआई के अधिकारी मानसून में हाईवे की देखरेख और रखरखाव में नाकाम हुए हैं।
हाईकोर्ट ने परवाणू से सोलन-कैथलीघाट तक काम करने वाले सभी ठेकेदारों का विवरण मांगा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी विशेष ठेकेदार को काम देने में कोई सांठगांठ तो नहीं की गई है, जो उचित सेवा प्रदान करने में असफल रहे हैं। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने एनएच के रखरखाव के लिए सभी ठेके एक व्यक्ति विशेष को देने के आरोप लगाए। हाईकोर्ट ने राजमार्ग पर बन रहे एक पुल के निर्माण में अनियमिताओं पर चिंता जताई है। यह पुल सलोगड़ा में अपोलो टायर्स के पास है। अदालत ने पाया कि एक पिलर की ऊंचाई 77.280 मीटर है, जो स्थिरता और भार वहन क्षमता के आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहा है। न्यायालय ने एनएचएआई से इस पुल के पिलर बनाने पर अब तक कितनी राशि खर्च हुई है, इसका विवरण भी मांगा है। अदालत ने ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में भी पूछा है।