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हिमाचल हाईकोर्ट: पति के चरित्र पर झूठे आरोप लगाना और अफसरों से शिकायत करना मानसिक क्रूरता

Thu, 24 Sep 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 05:30 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने तलाक मामले में स्पष्ट किया कि पत्नी की ओर से पति के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाना और उसके वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से शिकायत करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।

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Himachal high court: Making false allegations about a husband character and complaining to officials constitut
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक मामले में स्पष्ट किया कि पत्नी की ओर से पति के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाना और उसके वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से शिकायत करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बल (सेना) एक सख्त अनुशासन, उच्च नैतिक मानकों और आचार संहिता पर काम करते हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई जीवनसाथी अपने साथी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों को अनैतिक व्यवहार या अवैध संबंधों की लिखित शिकायतें भेजता है, तो यह महज एक साधारण घरेलू विवाद नहीं रह जाता। यह कदम कार्यस्थल पर उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

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अदालत ने पाया कि पत्नी ने अपने पति पर उसकी ही भाभी के साथ अवैध संबंध होने के गंभीर आरोप लगाए थे और इसकी लिखित शिकायतें सेना के आला अधिकारियों से की थीं। हालांकि, कानूनी कार्यवाही के दौरान वह इन आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत या गवाह पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी की वफादारी पर बिना किसी ठोस सबूत के कीचड़ उछालना और उसके सहकर्मियों व वरिष्ठों के सामने उसकी छवि खराब करना वैवाहिक रिश्ते की बुनियाद को खत्म कर देता है।

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ऐसे में पीड़ित पक्ष से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इस अपमान को सहकर साथ रहे। इन्हीं तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पत्नी की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा मंजूर किए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा। मामले के अनुसार दोनों का विवाह साल 2002 में हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। शादी के कुछ साल बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा और 2011 से अलग रह रहे थे। पति (सेना में कार्यरत था) ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने उस पर दहेज के झूठे आरोप लगाए, उसे घर से बेदखल किया और झूठी एफआईआर दर्ज करवाकर हवालात की हवा खिलाई। इन्हीं आधारों पर पति को फैमिली कोर्ट से तलाक मिल गया था।

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